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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'स्वतंत्रता का अधिकार' से संबंधित है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 19 नागरिकों को विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताएं प्रदान करता है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं - अनुच्छेद 308 से 323) के अंतर्गत 'संघ लोक सेवा आयोग' (UPSC) और 'राज्य लोक सेवा आयोगों' (SPSC) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा आयोग के प्रत्येक सदस्य को अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) अपने पद पर बने रहने का अधिकार होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के तहत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह सदस्य राज्य लोक सेवा आयोग का ही क्यों न हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा हटाया जाना उच्चतम न्यायालय के प्रतिवेदन के आधार पर किया जाता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 319 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के पद पर समाप्त होने वाले कार्यकाल के बाद वह व्यक्ति भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होता है, जबकि किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने पर वह संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है, किंतु भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 25 और 26' के अंतर्गत प्रदत्त 'धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार' तथा इसके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 25 न केवल अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है, बल्कि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन होने के साथ-साथ राज्य को किसी भी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य धर्मनिरपेक्ष क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन करने की शक्ति भी देता है। 2. ऐतिहासिक 'शिरूर मठ वाद (1954)' में उच्चतम न्यायालय ने 'आवश्यकता के सिद्धांत' (Doctrine of Essentiality) को प्रतिपादित किया था, जिसके तहत न्यायालय यह निर्धारित करता है कि कौन-ся धार्मिक अभ्यास या अनुष्ठान किसी धर्म का एक अनिवार्य (Essential) और अभिन्न हिस्सा है, और केवल उन्हीं अनिवार्य प्रथाओं को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होता है। 3. अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और दान प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने का अधिकार देता है, किंतु इसके तहत किसी भी धार्मिक संप्रदाय को अपनी धार्मिक मामलों के प्रबंधन के लिए अपनी संपत्ति का प्रशासन करने का अनन्य अधिकार प्राप्त है, और राज्य किसी भी विधि के माध्यम से इस प्रशासनिक शक्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणीयता' (Ocean Salinity) के वितरण, नियंत्रण करने वाले कारकों और उसके प्रादेशिक प्रतिमानों (Spatial Patterns) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरों में लवणीयता की मात्रा को निर्धारित करने वाले प्रमुख कारकों में वाष्पीकरण, वर्षण, नदियों द्वारा मीठे पानी का अंतःप्रवाह (Runoff) और महासागरीय धाराएं शामिल हैं, तथा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर महासागरीय लवणीयता में निरंतर और एकसमान रैखिक (Linear) वृद्धि होती जाती है। 2. खुले महासागरों की तुलना में आंशिक रूप से घिरे हुए बंद समुद्रों (Enclosed Seas) में लवणीयता का स्तर अत्यधिक उच्च हो सकता है यदि वहां वाष्पीकरण की दर उच्च हो और मीठे पानी का प्रवेश न्यूनतम हो, जैसा कि लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी के मामलों में देखा जाता है। 3. जल की गहराई के साथ लवणीयता में परिवर्तन की जो क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर परत पाई जाती है, उसमें 'हैलोक्लाइन' (Halocline) वह क्षेत्र या परत होती है जहां गहराई के साथ लवणीयता में तीव्र परिवर्तन (अक्सर तीव्र वृद्धि) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत 'संविधान में संशोधन' (Amendment of the Constitution - अनुच्छेद 368) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की पहल केवल संसद के किसी भी सदन में एक विधेयक प्रस्तुत करके ही की जा सकती है, और इसके लिए किसी भी परिस्थिति में राज्य के विधानमंडलों द्वारा संशोधन विधेयक लाने की अनुमति नहीं दी जाती है, साथ ही इस विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) की आवश्यकता अनिवार्य होती है। 2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया, संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्तियों का विस्तार, या सातवीं अनुसूची की कोई सूची) में संशोधन करने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (प्रत्येक सदन के कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत) के साथ-साथ देश के कुल राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से उसका अनुसमर्थन (Ratification) किया जाना अनिवार्य है। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure of the Doctrine) के सिद्धांत के अनुसार, संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन संविधान के संघीय स्वरूप या लोकतांत्रिक प्रणाली को प्रभावित न करे, और न्यायपालिका द्वारा मूल संरचना के दायरे में न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति को किसी भी संवैधानिक संशोधन के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? हाल ही में लगातार आए शक्तिशाली भूकंपों के बाद किस देश ने आपातकाल की घोषणा की है?
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