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Civil services
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कैबिनेट मिशन में कितने ब्रिटिश मंत्री सदस्य के रूप में आए थे?

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कैबिनेट मिशन में तीन ब्रिटिश मंत्री (पैथिक लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर) शामिल थे।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ - अनुच्छेद 308 से 323) के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) और लोक सेवा आयोगों के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अतिरिक्त किसी अन्य नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रावधान कर सके, बशर्ते राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा की शर्तों का निर्धारण करने की अंतिम शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है, किंतु इन सेवाओं के अधिकारियों को उनके पद से हटाने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य सरकार के पास होता है जहाँ वे सेवारत हैं, और केंद्र सरकार इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। 3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के किसी सदस्य को उसकी पदावधि की समाप्ति से पहले केवल राष्ट्रपति द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच रिपोर्ट के पश्चात ही हटाया जा सकता है, तथा UPSC के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद से हटने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के नियोजन (Employment) के पात्र नहीं होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? किन ग्रहों के चारों ओर छल्ले (Rings) पाए जाते हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) तथा इसकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति उन मामलों में भी प्रयोग की जा सकती है जहाँ मृत्युदंड दिया गया हो। 2. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) के विपरीत, राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति में मृत्युदंड के मामलों में निलंबन, परिहार या लघुकरण के साथ-साथ पूर्ण क्षमा देने का अधिकार शामिल है, लेकिन राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है। 3. 'ईश्वर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा अन्य ऐतिहासिक मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान याचिका पर लिए गए निर्णय की न्यायिक समीक्षा किसी भी आधार पर नहीं की जा सकती, क्योंकि यह राष्ट्रपति का पूर्ण रूप से विवेकपूर्ण और उन्मुक्ति प्राप्त विशेषाधिकार है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? क्या कैबिनेट मिशन ने भारत के विभाजन को स्वीकार किया था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' के अंतर्गत संसद सदस्यों के 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) और 'अनुच्छेद 194' के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदस्यों के विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुसार संसद में या उसकी किसी समिति में संसद सदस्य द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती, और यह उन्मुक्ति (Immunity) संसद के सदस्यों के साथ-साथ उन व्यक्तियों को भी प्राप्त है जो संसद की कार्यवाही या उसके किसी सदन के प्राधिकार से किसी रिपोर्ट, पत्र, वोटों या विवरण को प्रकाशित करते हैं। 2. यदि संसद का कोई सदन अपने किसी विशेषाधिकार के हनन या सदन की अवमानना (Breach of Privilege or Contempt of House) के लिए किसी व्यक्ति को दंडित करता है या सदन के समक्ष हाजिर होने का आदेश देता है, तो न्यायालयों को इस बात की न्यायिक समीक्षा करने का पूर्ण अधिकार है कि सदन द्वारा अपनी विशेषाधिकार शक्ति का प्रयोग किस प्रक्रिया के तहत किया गया है, और न्यायालय विशेषाधिकार के दायरे को तय कर सकता है। 3. जब तक संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं बनाया जाता है, तब तक भारत के प्रत्येक सदन और उसके सदस्यों व समितियों के विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के ठीक पहले यूनाइटेड किंगडम की 'हाउस ऑफ कॉमन्स' (House of Commons) के पास थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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