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सुमेलित कीजिए: 54-राष्ट्रपति का निर्वाचन, 61-महाभियोग, 72-क्षमादान की शक्ति, 74-मंत्रिपरिषद की सहायता एवं सलाह।

Detailed Explanation

सभी अनुच्छेद अपने विषयों के साथ सही सुमेलित हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 202' से 'अनुच्छेद 207' तक उल्लिखित 'राज्य विधानमंडल की वित्तीय प्रक्रिया और धन विधेयकों' (Financial Procedures and Money Bills) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 199 के अनुसार, कोई विधेयक 'धन विधेयक' (Money Bill) तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे उपबंध शामिल हों जो करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, अथवा राज्य की संचित निधि से धन के विनियोजन से संबंधित हों, और यदि किसी विधेयक में धन संबंधी मामलों के साथ-साथ अन्य गैर-वित्तीय मामले भी मिला दिए जाते हैं, तो वह स्वतः एक धन विधेयक बन जाता है। 2. 'राज्य के वित्त विधेयक' (Financial Bills) के संदर्भ में, अनुच्छेद 207 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि ऐसा कोई भी विधेयक जो राज्य की संचित निधि से व्यय उपबंधित करता है, राज्य विधानसभा में तब तक पुनर्स्थापित या पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि राज्यपाल ने उस विधेयक को उस विधानसभा में विचार के लिए संस्तुति (Recommendation) न दे दी हो। 3. राज्य विधान परिषद (Legislative Council) को किसी धन विधेयक के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; वह न तो धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, तथा उसे विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात अधिकतम चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना होता है, अन्यथा उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1919 के 'मॉण्टग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार' (Montagu-Chelmsford Reforms) और उनके अंतर्गत स्थापित 'द्वैध शासन प्रणाली' (Dyarchy) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मॉण्टग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के आधार पर भारत सरकार अधिनियम, 1919 पारित किया गया, जिसके तहत प्रांतीय विषयों को दो भागों—'आरक्षित' (Reserved) और 'हस्तांतरित' (Transferred) में विभाजित किया गया, जहाँ आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर द्वारा कार्यकारी पार्षदों की सहायता से किया जाता था जो प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं थे। 2. हस्तांतरित विषयों में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्थानीय स्वशासन और कृषि जैसे विषय शामिल किए गए थे, जिनका प्रशासन गवर्नर द्वारा मंत्रियों की सहायता से चलाया जाता था, और ये मंत्री प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होते थे तथा विधानमंडल द्वारा हटाए जा सकते थे। 3. इस अधिनियम के तहत केंद्र स्तर पर भी द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई, जिसके अंतर्गत केंद्रीय विधानमंडल को दो सदनों (राज्य परिषद और केंद्रीय विधानसभा) में विभाजित किया गया तथा गवर्नर-जनरल को यह पूर्ण अधिकार दिया गया कि वह विधानमंडल द्वारा अस्वीकृत किए गए किसी भी विधेयक को कानून के रूप में प्रख्यापित (Certify) कर सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? आत्मीय सभा का गठन किस उद्देश्य से किया गया था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता का दायरा व्यापक है क्योंकि वे मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक या सामान्य उद्देश्य के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं। 2. सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का प्रादेशिक क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) पूरे भारत पर विस्तृत है, जबकि किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सामान्यतः केवल उसी राज्य तक सीमित होता है जिसके अधिकार क्षेत्र के भीतर वह उच्च न्यायालय स्थित है, सिવાય इसके कि वह विवादित प्राधिकारी उस उच्च न्यायालय के प्रादेशिक क्षेत्र के बाहर स्थित हो। 3. अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है (जिसके अंतर्गत संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्राप्त है), इसलिए सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिट जारी करने से अपनी अधिकारिता का अभाव (Want of jurisdiction) बताकर इंकार नहीं कर सकता, जबकि उच्च न्यायालय के समक्ष अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल करना एक विवेकाधीन (Discretionary) उपाय है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) तथा 'जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) की स्थापना वर्ष 1974 में 'जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974' के अंतर्गत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक सांविधिक (Statutory) निकाय के रूप में की गई थी, और यह बोर्ड देश में वायु प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण के लिए भी मानक तय करने के लिए वैधानिक रूप से उत्तरदायी है। 2. जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया को स्थापित करने या संचालित करने से पूर्व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) या CPCB से पूर्व सहमति (Consent to Establish and Consent to Operate) प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, तथा अधिनियम के तहत जल प्रदूषण के मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए कारावास और मौद्रिक दंड दोनों का प्रावधान किया गया है। 3. 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986' के विपरीत, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अंतर्गत CPCB या SPCB के अधिकारियों को किसी भी औद्योगिक इकाई या परिसर में प्रवेश करने, निरीक्षण करने, परीक्षण के लिए जल या effluent के नमूने (Samples) लेने की कोई स्वतंत्र सांविधिक शक्ति प्राप्त नहीं है, जब तक कि इसके लिए संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट से पूर्व वारंट प्राप्त न किया गया हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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