BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
8 views

प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कौन थे?

Detailed Explanation

आर्यभट्ट प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने खगोलीय पिंडों और उनकी गति का अध्ययन किया था.
Share:

Related Questions

बाबर और राणा सांगा के बीच खानवा का युद्ध किस वर्ष हुआ? माउंटबेटन योजना का संबंध किससे है? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और इसके लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में देश भर के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के रूप में लॉन्च किया गया था। 2. इस कार्यक्रम का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश के विशिष्ट गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5 दोनों) सांद्रता में आधार वर्ष 2017 की तुलना में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी करने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 3. 'गैर-प्राप्ति शहर' वे शहर होते हैं जो पिछले पाँच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) के लगातार अनुरूप नहीं रहे हैं, और NCAP के तहत इन शहरों को अपने स्थानीय स्रोतों (जैसे सड़क की धूल, vehicular emissions और बायोमास बर्निंग) को नियंत्रित करने के लिए 'शहरी कार्य योजनाएं' (City Action Plans) तैयार करना अनिवार्य किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) एवं लोकहित याचिका (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालयों का यह रिट अधिकारक्षेत्र उनका एक अनन्य (Exclusive) अधिकार है जिसे संसद विधि द्वारा भी सर्वोच्च न्यायालय को हस्तांतरित नहीं कर सकती है। 2. 'पी. एन. भगवती' के नेतृत्व में 1980 के दशक में विकसित 'लोकहित याचिका' (PIL) की अवधारणा ने पारंपरिक 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का नियम) को शिथिल कर दिया, जिसके तहत अब समाज का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या सामाजिक संगठन समाज के शोषित, वंचित या गरीबों के मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 3. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों का अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारक्षेत्र संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है, और संसद किसी भी सांविधिक न्यायाधिकरण (Tribunal) की स्थापना करके उच्च न्यायालयों के इस न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ' (Pardoning Powers - Article 72) तथा राज्यपाल की शक्तियों (Article 161) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, जहाँ दंड या दंडादेश किसी ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, या सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिया गया है, या मृत्युदंड (Death Sentence) का मामला है। 2. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) और राष्ट्रपति की शक्ति (अनुच्छेद 72) के बीच एक मुख्य अंतर यह है कि राज्यपाल को सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के संबंध में कोई क्षमादान शक्ति प्राप्त नहीं है, और साथ ही राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) या निरस्त नहीं कर सकता है, यद्यपि वह अन्य मामलों में दंडादेश का लघुकरण या परिहार कर सकता है। 3. 'एकीकरण और न्यायिक समीक्षा' के सिद्धांतों के तहत, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा क्षमादान याचिकाओं पर लिए गए निर्णयों को देश के किसी भी न्यायालय में किसी भी परिस्थिति में चुनौती नहीं दी जा सकती है, क्योंकि यह पूरी तरह से कार्यपालिका की एक अनन्य (Exclusive) और पूर्ण विवेकाधीन शक्ति है जिस पर न्यायिक पुनरावलोकन लागू नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.