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निम्नलिखित में से कौन से 'आंतरिक ग्रह' (Inner Planets) हैं?

Detailed Explanation

बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल आंतरिक ग्रह हैं क्योंकि ये सूर्य के बहुत नजदीक स्थित हैं और चट्टानों से बने हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा इनकी प्रकृति और प्रवर्तनीयता के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 में स्पष्ट रूप से यह उपबंध किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं। 2. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व गैर-न्यायोचित हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर अपने विभिन्न निर्णयों में यह प्रतिपादित किया है कि मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि वे एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों मिलकर संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का निर्माण करते हैं। 3. संविधान में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए नीति निर्देशक तत्वों में बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना, समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता, तथा उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? क्रिप्स मिशन का मुख्य प्रस्ताव क्या था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) एवं लोकहित याचिका (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालयों का यह रिट अधिकारक्षेत्र उनका एक अनन्य (Exclusive) अधिकार है जिसे संसद विधि द्वारा भी सर्वोच्च न्यायालय को हस्तांतरित नहीं कर सकती है। 2. 'पी. एन. भगवती' के नेतृत्व में 1980 के दशक में विकसित 'लोकहित याचिका' (PIL) की अवधारणा ने पारंपरिक 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा ही अदालत जाने का नियम) को शिथिल कर दिया, जिसके तहत अब समाज का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या सामाजिक संगठन समाज के शोषित, वंचित या गरीबों के मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। 3. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों का अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारक्षेत्र संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अभिन्न हिस्सा है, और संसद किसी भी सांविधिक न्यायाधिकरण (Tribunal) की स्थापना करके उच्च न्यायालयों के इस न्यायिक समीक्षा के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 360' के अंतर्गत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के प्रावधानों और प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद अपनी पहली बैठक से 30 दिनों की समाप्ति तक अस्तित्व में बनी रहती है, बशर्ते इस बीच इसे राज्यसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया हो। 2. वित्तीय आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार को यह कार्यकारी अधिकार प्राप्त होता है कि वह किसी राज्य को भारत के वित्तीय औचित्य (Financial Propriety) के सिद्धांतों का पालन करने के लिए आवश्यक निर्देश दे सकती है, जिसके तहत राज्य के अधीन सेवा करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के व्यक्तियों के वेतनों और भत्तों में कटौती करने का आदेश दिया जा सकता है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल और राष्ट्रपति शासन के विपरीत, वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को एक बार संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद, इसे वापस लेने के लिए संसद के पुनः अनुमोदन की आवश्यकता होती है और राष्ट्रपति अपनी इच्छा से इसे स्वतः निरस्त नहीं कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? मौर्यकालीन प्रशासन में 'समाहर्ता' (Samaharta) का कार्य क्या था?
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