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त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
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शरीय, निम्नलिखित में से किसके वंचित हो जाने से धनावेशित हो जायेगा?

Detailed Explanation

इलेक्ट्रॉन की कमी से वस्तु धनावेशित हो जाती है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भाग-III (मूल अधिकार), भाग-IV (राज्य के नीतिनिदेशक तत्व - DPSP) तथा भाग-IVक (मूल कर्त्तव्य) के अंतर्संबंधों और उनकी न्यायोचित प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार (Article 12-35) न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के हैं और इनका हनन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) की शरण ली जा सकती है, जबकि राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (Article 36-51) गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है। 2. स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए मूल कर्त्तव्य (Article 51A) प्रकृति से गैर-न्यायोचित हैं और इनके उल्लंघन पर संविधान स्वयं किसी प्रकार के दंड या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं करता है, किंतु संसद विधि बनाकर इन्हें प्रभावी बना सकती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों (भाग-III) और नीतिनिदेशक तत्वों (भाग-IV) के बीच संतुलन के 'रॉक-सॉलिड' (Rock-solid) संतुलन पर टिकी है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर पूर्ण प्राथमिकता देना संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन होगा। 4. अनुच्छेद 31-C के अनुसार यदि संसद कोई ऐसी विधि बनाती है जो नीतिनिदेशक तत्वों के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को कार्यान्वित करने के लिए है, तो इस आधार पर उस विधि को इस न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? 1857 की क्रांति के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? छठ पूजा के अनुष्ठानों के क्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं? प्रथम मानव जीवाश्म भारत की किस नदी घाटी से प्राप्त हुआ था? भौतिकी के विविध परिप्रेक्ष्य में विभिन्न भौतिक राशियों, उनके मापन यंत्रों, तथा उनसे जुड़े नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'टैकोमीटर' (Tachometer) एक ऐसा घूर्णन मापी यंत्र है जिसका उपयोग किसी शाफ्ट या मोटर की घूर्णन गति (RPM - Revolutions Per Minute) को मापने के लिए किया जाता है, जबकि 'पायरोमीटर' (Pyrometer) अत्यधिक उच्च तापमान (जैसे सूर्य या भट्टी का तापमान) को मापने के लिए विकिरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। 2. 'रामान प्रभाव' (Raman Effect) के अनुसार, जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) से गुजरता है, तो उसका एक अंश प्रकीर्णन (Scattering) के दौरान अपनी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) में परिवर्तन कर लेता है, जिसकी खोज के लिए सी.वी. रमन को वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। 3. 'क्यूरी' (Curie) तापमान वह विशिष्ट तापमान है जिसके ऊपर जाने पर कोईलौह-चुंबकीय (Ferromagnetic) पदार्थ अपने चुंबकीय गुण खो देता है और एक अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है। 4. 'सुपरकंडक्टिविटी' (अतिचालकता) की खोज हेइके कामरलिंग ओन्स (Heike Kamerlingh Onnes) द्वारा की गई थी, जिसमें किसी पदार्थ का विद्युत प्रतिरोध अत्यधिक उच्च तापमान पर अनंत हो जाता है और वह संपूर्ण चुंबकीय क्षेत्र को बाहर कर देता है जिसे 'माइसनर प्रभाव' कहते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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