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History of India
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खिलजी वंश के शासन का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
खिलजी काल में सल्तनत का विस्तार दक्षिण तक हुआ।
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गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे की छत किस आकार की है जो हिंदू मंदिरों से प्रभावित लगती है?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न विभागों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दीवान-ए-कोही (कृषि विभाग) - मुहम्मद बिन तुगलक
2. दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग) - बलबन
3. दीवान-ए-बदगान (दासों का विभाग) - फिरोजशाह तुगलक
4. दीवान-ए-मुस्तखराज (राजस्व विभाग और बकाया वसूली) - अलाउद्दीन खिलजी
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट), जो 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित हुआ था, के तहत ब्रिटिश सरकार द्वारा सभी राजनीतिक कैदियों को तत्काल रिहा करने की सहमति दी गई थी, किंतु जिन राजनीतिक बंदियों पर हिंसा के आरोप थे (जैसे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु), उनकी रिहाई को इस समझौते में शामिल नहीं किया गया था।
2. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्ष 1931 के अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, जिसमें गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था।
3. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, जहाँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'कम्युनल अवार्ड' (साम्प्रदायिक पंचाट) के प्रावधानों पर दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल को लेकर गांधीजी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हुए थे।
4. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी ने पुणे की यरवदा जेल में ब्रिटिश सरकार द्वारा दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था के विरोध में आमरण अनशन शुरू किया, तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से गांधीजी और अंबेडकर के बीच ऐतिहासिक 'पूना पैक्ट' संपन्न हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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फिरोज शाह तुगलक के समय "इक्ता" प्रणाली की क्या स्थिति थी?
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गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा समाज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'अग्रहार' भूमि वह भूमि होती थी जो ब्राह्मणों को कर-मुक्त रूप से दान दी जाती थी, और इस प्रकार की भूमि पर किसानों से कर वसूलने का अधिकार पूरी तरह से राजा के पास सुरक्षित रहता था, दानग्राही ब्राह्मण के पास नहीं।
2. गुप्त प्रशासन में विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ केंद्रीय अधिकारियों के साथ-साथ 'विषयपति' (जिला अधिकारी) और स्थानीय निकायों जैसे 'पुश्तपाल' (रजिस्ट्रार) व श्रेणियों की महत्वपूर्ण भूमिका हुआ करती थी।
3. गुप्त राजवंश के शासकों ने सर्वाधिक संख्या में शुद्ध सोने के सिक्के (दीनार) जारी किए, किंतु फाह्यान के यात्रा विवरण से ज्ञात होता है कि दैनिक लेन-देन में कौड़ियों (Cowries) का प्रयोग बहुतायत में होता था।
4. शूद्रों की स्थिति में मौर्योत्तर काल की तुलना में कुछ सुधार हुआ, क्योंकि गुप्तकालीन स्मृति ग्रंथों और पुराणों में उन्हें कृषि कार्य करने और पशुपालन की अनुमति प्रदान की गई, तथा वे कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लेने लगे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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