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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या में सामान्यतः कमी आती है, परंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या का मान अधिक होने से उनका आकार अपने समूह के अन्य तत्वों की तुलना में बड़ा हो जाता है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक नहीं होता है, और आवर्त सारणी में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान सर्वाधिक होता है, जो फ्लोरीन से भी अधिक ऋणात्मक है।
- 3. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है, और किसी दिए गए परमाणु के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होता है क्योंकि उदासीन परमाणु की तुलना में धनायन से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, डी-ब्लॉक (d-block) के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है क्योंकि उनके आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, और समूह 12 के तत्व (जैसे Zn, Cd, Hg) पूर्णतः भरे d-कक्षक होने के कारण संक्रमण तत्व नहीं माने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि उत्कृष्ट गैसों के मामले में वांडर वॉल त्रिज्या मापी जाती है, जो अन्य तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी अवश्य होती है, परंतु वे अपने आवर्त में आकार में सबसे बड़े नहीं बल्कि सबसे छोटे (यानी अपने आवर्त में उच्चतम प्रभावी नाभिकीय आवेश और न्यूनतम आकार वाले) होते हैं, क्योंकि उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम कोश पूर्ण भरे होते हैं और उनके परमाणु क्रमांक के साथ उनका आकार आवर्त में सबसे कम होता है। कथन 2, 3 और 4 बिल्कुल सही हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार आवर्ती गुण और संक्रमण तत्वों की परिभाषा इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित है।
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों (Metals, Non-metals and their Compounds) के रासायनिक गुणों और निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite Welding) की प्रक्रिया में एल्युमिनियम का उपयोग एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को गलित अवस्था में आयरन धातु में अपचयित कर देता है, और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
2. 'जल गैस' (Water Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का एक सममोलर मिश्रण है, जबकि 'प्रोड्यूसर गैस' (Producer Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन का मिश्रण होती है, और दोनों ही ईंधन गैसों के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
3. बेसेमर प्रक्रम (Bessemer Process) द्वारा कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) का उत्पादन किया जाता है, जिसमें द्रवित लोहे से अवांछित अशुद्धियों को दूर करने के लिए गर्म हवा का झोंका प्रवाहित किया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण प्रायः 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Process) द्वारा किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) संग्राहक (Collector) के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र और विभिन्न हॉर्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एड्रिनल ग्रंथि का वल्कुट (Adrenal Cortex) भाग रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र के नियंत्रण में मुख्य रूप से 'एल्डोस्टेरोन' मिनरलोकोर्टिकोइड हॉर्मोन का स्रावण करता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम आयनों और जल के पुनравशोषण तथा पोटेशियम एवं फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
2. अग्र पीयूष ग्रंथि (Adenohypophysis) द्वारा स्रावित प्रोलैक्टिन हॉर्मोन का मुख्य कार्य दुग्ध के संश्लेषण को प्रेरित करना है, जबकि दुग्ध का निष्कासन (Milk Ejection) पश्च पीयूष ग्रंथि से स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन द्वारा संकुचन के माध्यम से नियंत्रित होता है।
3. अग्नाशय के लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में पाई जाने वाली अल्फा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं जो ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है, जबकि बीटा कोशिकाएँ 'ग्लूकागॉन' का स्रावण करती हैं जो रुधिर में शर्करा के स्तर को कम करता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, थायराइड ग्रंथि से स्रावित कैल्सीटोनिन हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करके रक्त में कैल्सियम आयनों के स्तर को बढ़ाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैविक अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं विटामिन) की जैव-रासायनिक संरचना तथा कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एमाइलोज़ (Amylose) स्टार्च का जल-विलेय घटक है जो एक रेखीय पॉलिशैकराइड है, जिसमें ग्लूकोज की इकाइयाँ केवल $\alpha-1,4$ ग्लायकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, जबकि एमाइलोपेक्टिन (Amylopectin) जल-अविलेय घटक है जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ बंधों तथा शाखाएँ $\alpha-1,6$ बंधों द्वारा बनती हैं।
2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाता है, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसीन और फेनिलएलानिन।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विटामिन K (फाइलोक्विनोन) वसा में घुलनशील विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन के संश्लेषण के लिए अनिवार्य है और इसकी कमी से रक्त का थक्का जमने में विलंब होता है।
4. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक जल-विलेय विटामिन है जिसे मानव शरीर यकृत में संग्रहित कर सकता है और इसकी अत्यधिक कमी से 'बेरी-बेरी' नामक रोग उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आणविक व आनुवंशिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') मूल रूप से ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं, जिनके निर्माण को नियंत्रित करने वाला जीन 'I' क्रोमोसोम 9 पर स्थित होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का पूर्ण अभाव होता है, क्योंकि उनमें FUT1 (H-जीन) का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं, हालांकि वे किसी भी अन्य ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं।
3. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक कैस्केड प्रक्रिया के दौरान, फैक्टर XII (हागेमैन फैक्टर) के सक्रिय होने से अंततः प्रोथ्रॉम्बिन एक्टिवेटर का निर्माण होता है, जो कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, Rh कारक (Rhesus factor) एक प्रोटीन है जो RBC की सतह पर उपस्थित होता है, और Rh-ऋणात्मक माता तथा Rh-धनात्मक पिता से उत्पन्न प्रथम संतान में 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) का खतरा सामान्यतः बहुत अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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