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चुम्बकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
- 2. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम के प्रतिकूल (विरुद्ध) है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का विरोध करती है जो इसे उत्पन्न करता है।
- 3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने से गुजरने वाले विद्युत धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक हेनरी (Henry) होता है।
- 4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) धातु के बड़े टुकड़ों में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फैराडे के नियम के अनुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन की समय-दर के समानुपाती होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम के **अनुकूल** है, न कि प्रतिकूल। कथन 3 सही है, स्वप्रेरण कुंडली का वह गुण है जो फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है और इसका मात्रक हेनरी है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, कथन 4 भी पूर्णतः सत्य है क्योंकि भंवर धाराएँ धातु के चालकों में उत्पन्न होती हैं और इनका उपयोग ब्रेकिंग व इंडक्शन फर्नेस में होता है। अतः सही विकल्प (a) है।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों…
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मानव पोषण और जैविक अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं…
Related Questions
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) और गैर-यादृच्छिक संगमन अनुपस्थित हों।
2. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का सार्वभौमिक रूप से पालन सभी द्विगुणित जीवों पर होता है, चाहे दो अलग-अलग लक्षणों को नियंत्रित करने वाले जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास-पास (Linked genes) क्यों न स्थित हों।
3. लामार्कवाद के विपरीत, डार्विनवाद (Natural Selection) इस बात पर जोर देता है कि जीव अपने जीवनकाल में जिन उपार्जित लक्षणों (Acquired characters) को प्राप्त करते हैं, वे अगली पीढ़ी में सीधे वंशागत होते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है लेकिन उनके कार्य भिन्न हो सकते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent evolution) का प्रमाण देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों (Metals, Non-metals and their Compounds) के रासायनिक गुणों और निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite Welding) की प्रक्रिया में एल्युमिनियम का उपयोग एक अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को गलित अवस्था में आयरन धातु में अपचयित कर देता है, और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है।
2. 'जल गैस' (Water Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का एक सममोलर मिश्रण है, जबकि 'प्रोड्यूसर गैस' (Producer Gas) कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन का मिश्रण होती है, और दोनों ही ईंधन गैसों के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।
3. बेसेमर प्रक्रम (Bessemer Process) द्वारा कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) का उत्पादन किया जाता है, जिसमें द्रवित लोहे से अवांछित अशुद्धियों को दूर करने के लिए गर्म हवा का झोंका प्रवाहित किया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण प्रायः 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Process) द्वारा किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) संग्राहक (Collector) के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आणविक व आनुवंशिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') मूल रूप से ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं, जिनके निर्माण को नियंत्रित करने वाला जीन 'I' क्रोमोसोम 9 पर स्थित होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का पूर्ण अभाव होता है, क्योंकि उनमें FUT1 (H-जीन) का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं, हालांकि वे किसी भी अन्य ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं।
3. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक कैस्केड प्रक्रिया के दौरान, फैक्टर XII (हागेमैन फैक्टर) के सक्रिय होने से अंततः प्रोथ्रॉम्बिन एक्टिवेटर का निर्माण होता है, जो कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, Rh कारक (Rhesus factor) एक प्रोटीन है जो RBC की सतह पर उपस्थित होता है, और Rh-ऋणात्मक माता तथा Rh-धनात्मक पिता से उत्पन्न प्रथम संतान में 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) का खतरा सामान्यतः बहुत अधिक होता है।
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण और विटामिनों की जैव-रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जिसमें कोबाल्ट धातु आयन पाया जाता है, और इसका यकृत में कई वर्षों तक भंडारण किया जा सकता है, तथा इसके अवशोषण के लिए आमाशय की भित्ति से 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
2. ग्लाइकोजन (Glycogen) जन्तुओं और कवकों में मुख्य संचित पॉलिशैकराइड है, जिसकी संरचना एमाइलोपेक्टिन के समान होती है लेकिन इसमें अत्यधिक सघन शाखन (Branching) पाया जाता है जो प्रत्येक 8 से 12 ग्लूकोज इकाइयों के बाद $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंध के माध्यम से होता है।
3. आवश्यक वसा अम्ल (Essential Fatty Acids) जैसे लिनोलिक अम्ल और लिनोलेनिक अम्ल का संश्लेषण मानव शरीर की कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में किया जा सकता है, इसलिए इन्हें आहार में लेना अनिवार्य नहीं होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E और K) शरीर के यकृत और वसा ऊतकों में संगृहीत होते हैं, और इनमें से विटामिन D वस्तुतः एक प्रो-हॉर्मोन के रूप में कार्य करता है जो कैल्शियम और फॉस्फेट के होमियोस्टेसिस को विनियमित करता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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