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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयव (Isomers) और ईंधन की गुणवत्ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल्केन्स (Alkanes) में श्रृंखला समावयवता (Chain isomerism) न्यूनतम चार कार्बन परमाणुओं वाले ब्यूटेन ($C_4H_{10}$) से प्रारंभ होती है, जिसमें सामान्य-ब्यूटेन (n-butane) और आइसो-ब्यूटेन (Iso-butane) प्रमुख समावयवी हैं।
- 2. विमानन ईंधनों (Jet Fuels) की दहन गुणवत्ता और 'नॉक-रोधी' (Anti-knock) क्षमता का निर्धारण 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) द्वारा किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन के लिए हेप्टेन को 0 तथा आइसो-ऑक्टेन को 100 अंक दिए जाते हैं।
- 3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जिसमें गंधहीन गैस होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से तीव्र गंधयुक्त 'एथिल मर्कैप्टेन' ($C_2H_5SH$) मिलाया जाता है ताकि रिसाव का आसानी से पता चल सके।
- 4. एल्काइन्स (Alkynes) में कार्बन-कार्बन त्रिबंध होता है, जिसमें एक सिग्मा ($σ$) और दो पाई ($π$) बंध होते हैं, और त्रिबंध से जुड़े दोनों कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं जिनकी ज्यामिति त्रिकोणीय समतलीय होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि श्रृंखला समावयवता न्यूनतम चार कार्बन परमाणुओं वाले एल्केन (अर्थात ब्यूटेन) से शुरू होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि ऑक्टेन संख्या में 'n-हेप्टेन' को 0 (निम्नतम नॉक प्रतिरोध) और 'आइसो-ऑक्टेन' (2,2,4-ट्रिमिलमेथिलपेंटेन) को 100 (सर्वोत्तम नॉक प्रतिरोध) अंक दिए जाते हैं, जबकि प्रश्न में विपरीत दिया गया है। कथन 3 सही है, LPG में प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होता है और रिसाव पहचान के लिए एथिल मर्कैप्टेन मिलाया जाता है। कथन 4 गलत है क्योंकि एल्काइन्स में त्रिबंध वाले कार्बन परमाणु $sp$ संकरित होते हैं और उनकी ज्यामिति रेखीय (Linear) होती है, न कि $sp^2$ त्रिकोणीय समतलीय। विकिपीडिया संदर्भ
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिक एवं कार्यात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा खोजी गई थी, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर उपस्थित विशिष्ट प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जबकि रक्त प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्राकृतिक प्रतिरक्षी (Antibodies) 'anti-A' और 'anti-B' वास्तव में इम्युनोग्लोबुलिन (IgM प्रकार के) होते हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे किसी भी मानक ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं लेकिन केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
3. Rh कारक (Rh Factor) की वंशागति के दौरान 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता की प्रथम संतान Rh-धनात्मक होती है, जिससे प्रथम गर्भावस्था के दौरान ही माता के शरीर में पर्याप्त Rh-प्रतिरक्षी विकसित हो जाते हैं जो पहली संतान को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
4. रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में 'प्रोथ्रॉम्बिन' को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह संपूर्ण प्रक्रिया विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार आंतरिक और बाह्य दोनों मार्गों द्वारा संचालित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का प्रतिकूल परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा सदैव उस कारण का समर्थन करती है जो इसे उत्पन्न करता है।
3. स्वप्रेरण (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक वेबर प्रति ऐम्पियर या हेनरी होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy Currents) धातु के बड़े टुकड़ों में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित आभासी धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के सैद्धांतिक एवं ऊष्मागतिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रॉन्स्टेड-लोरी अवधारणा के अनुसार, प्रत्येक अम्ल का एक संयुग्मी क्षार (Conjugate base) होता है और प्रत्येक क्षार का एक संयुग्मी अम्ल होता है, तथा एक प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा दुर्बल होता है और इसके विपरीत।
2. 'कठोर-मृदु अम्ल-क्षार' (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल छोटे आकार और उच्च आवेश घनत्व वाले होते हैं, जो मुख्य रूप से कठोर क्षारों के साथ स्थिरवैद्युत आकर्षण द्वारा स्थायी और प्रबल बंध बनाते हैं।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल का प्रबल क्षार के साथ पूर्ण उदासीनीकरण होता है, तो तुल्यांकी बिंदु (Equivalence point) पर विलयन का pH मान ठीक 7 होता है क्योंकि अम्ल और क्षार के मोल बराबर हो जाते हैं।
4. जल का स्वतः आयनन (Auto-ionization) एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है, जिसके कारण तापमान बढ़ने पर जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) बढ़ जाता है और शुद्ध जल का उदासीन pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि जल अभी भी रासायनिक रूप से उदासीन बना रहता है।
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कार्बनिक रसायन में एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Arenes) और उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेंजीन एक समतलीय (Planar) अणु है जिसमें सभी कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं, और इसके सभी छः कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई एकल बंध ($1.54 \mathring{A}$) तथा द्वि बंध ($1.34 \mathring{A}$) के बीच की मध्यवर्ती होती है, जिसका कारण डेलोराइजेशन ($delocalisation$) या अनुनाद (Resonance) है।
2. हकल के नियम ($4n + 2$ नियम) के अनुसार, किसी चक्रीय, समतलीय और पूर्णतः संयुग्मित (Fully conjugated) बहुसंयोजकता वाले पॉलीएकीन को एरोमैटिक होने के लिए उसके वलय में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $(4n + 2)$ के बराबर होनी चाहिए, जहाँ $n$ एक पूर्णांक ($n = 0, 1, 2, 3\dots$) है।
3. बेंजीन वलय पर होने वाली इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में, जब कोई सक्रियकारी समूह (जैसे $-OH$ या $-NH_2$) जुड़ा होता है, तो वह आने वाले समूह को मुख्य रूप से मेटा (meta) स्थिति पर निर्देशित करता है।
4. फ्रिडल-क्राफ्ट्स एल्किलेशन अभिक्रिया (Friedel-Crafts alkylation) के दौरान निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड ($AlCl_3$) एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है जो बेंजीन वलय पर आक्रमण करने के लिए कार्बोकैटायन (Electrophile) का निर्माण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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