General Science
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्षुद्रांत (Small intestine) के अंतिम भाग यानी शेषांत्र (Ileum) में विटामिन B12 के सक्रिय अवशोषण के लिए आमाशय की ऑक्सिंटिक कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
- 2. मानव श्वसन तंत्र में, अंतःश्वसन के दौरान डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है और इंट्रापल्मोनरी दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है, जिससे वायु फेफड़ों के भीतर प्रवेश करती है।
- 3. हृदय चक्र के दौरान, आलिंद-निलय (AV) वॉल्व (ट्रिकस्पिड और बिकस्पिड वॉल्व) का बंद होना 'डब' (Dubb) ध्वनि उत्पन्न करता है, जबकि सेमिलुनेर वॉल्व का बंद होना 'लब' (Lub) ध्वनि उत्पन्न करता है।
- 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका आवेगों के तीव्र और उछलते हुए (saltatory) संचरण के लिए माइलिन म्यान का निर्माण ओलिगोडेंड्रोसाइट्स (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र में यह कार्य श्वान कोशिकाओं (Schwann cells) द्वारा होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: आमाशय की भित्ति में पाई जाने वाली ऑक्सिंटिक (पेरिएटल) कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' स्रावित करती हैं, जो क्षुद्रांत के शेषांत्र भाग में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कथन 2 गलत है: अंतःश्वसन (Inhalation) के दौरान डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों के संकुचन से वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ता है जिससे इंट्रापल्मोनरी दाब वायुमंडलीय दाब से **कम** (ऋणात्मक) हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वायु फेफड़ों के भीतर प्रवेश करती है।
कथन 3 गलत है: हृदय चक्र के दौरान आलिंद-निलय वॉल्व (ट्रिकस्पिड और माइट्रल वॉल्व) का बंद होना 'लब' (Lub) नामक पहली ध्वनि उत्पन्न करता है, जबकि सेमिलुनेर वॉल्व (महाधमनी और फुफ्फुसीय वॉल्व) का बंद होना 'डब' (Dubb) नामक दूसरी ध्वनि उत्पन्न करता है।
कथन 4 सही है: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) में तंत्रिका तंतुओं पर माइलिन म्यान का निर्माण ओलिगोडेंड्रोसाइट्स द्वारा होता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में यह कार्य श्वान कोशिकाओं द्वारा किया जाता है।
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परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्वांटम संख्या (Quantum Numbers) के अनुसार, किसी परमाणु में मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) कक्षकों के आकार और ऊर्जा को निर्धारित करती है, जबकि द्विगंशी क्वांटम संख्या ($l$) कक्षकों की त्रि-विमीय ज्यामिति (आकृति) को दर्शाती है जिसका मान 0 से $(n-1)$ तक होता है।
2. पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं के मान कभी भी सर्वसम (समान) नहीं हो सकते, अर्थात् एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
3. हुंड का अधिकतम बहुलकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि समभ्रंश कक्षकों (Degenerate orbitals) में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ भर न जाए।
4. बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) पदार्थ की वह अवस्था है जिसे अत्यंत उच्च घनत्व वाली गैस को परम शून्य ताप ($0 \text{ K}$) के अत्यंत निकट तक ठंडा करके प्राप्त किया जाता है, जहाँ कणों की तरंगदैर्ध्य इतनी अधिक हो जाती है कि वे एक ही क्वांटम अवस्था में संगमित हो जाते हैं और विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह अतिपरमाण्विक व्यवहार प्रदर्शित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिक एवं कार्यात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा खोजी गई थी, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर उपस्थित विशिष्ट प्रतिजन (Antigens 'A' और 'B') प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, जबकि रक्त प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्राकृतिक प्रतिरक्षी (Antibodies) 'anti-A' और 'anti-B' वास्तव में इम्युनोग्लोबुलिन (IgM प्रकार के) होते हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों में 'H-प्रतिजन' का अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके कारण वे किसी भी मानक ABO समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दान कर सकते हैं लेकिन केवल बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
3. Rh कारक (Rh Factor) की वंशागति के दौरान 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-धनात्मक पिता और Rh-ऋणात्मक माता की प्रथम संतान Rh-धनात्मक होती है, जिससे प्रथम गर्भावस्था के दौरान ही माता के शरीर में पर्याप्त Rh-प्रतिरक्षी विकसित हो जाते हैं जो पहली संतान को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
4. रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की कैस्केड प्रक्रिया में 'प्रोथ्रॉम्बिन' को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह संपूर्ण प्रक्रिया विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार आंतरिक और बाह्य दोनों मार्गों द्वारा संचालित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Arenes) और उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेंजीन एक समतलीय (Planar) अणु है जिसमें सभी कार्बन परमाणु $sp^2$ संकरित होते हैं, और इसके सभी छः कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई एकल बंध ($1.54 \mathring{A}$) तथा द्वि बंध ($1.34 \mathring{A}$) के बीच की मध्यवर्ती होती है, जिसका कारण डेलोराइजेशन ($delocalisation$) या अनुनाद (Resonance) है।
2. हकल के नियम ($4n + 2$ नियम) के अनुसार, किसी चक्रीय, समतलीय और पूर्णतः संयुग्मित (Fully conjugated) बहुसंयोजकता वाले पॉलीएकीन को एरोमैटिक होने के लिए उसके वलय में $\pi$ इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $(4n + 2)$ के बराबर होनी चाहिए, जहाँ $n$ एक पूर्णांक ($n = 0, 1, 2, 3\dots$) है।
3. बेंजीन वलय पर होने वाली इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में, जब कोई सक्रियकारी समूह (जैसे $-OH$ या $-NH_2$) जुड़ा होता है, तो वह आने वाले समूह को मुख्य रूप से मेटा (meta) स्थिति पर निर्देशित करता है।
4. फ्रिडल-क्राफ्ट्स एल्किलेशन अभिक्रिया (Friedel-Crafts alkylation) के दौरान निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड ($AlCl_3$) एक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करता है जो बेंजीन वलय पर आक्रमण करने के लिए कार्बोकैटायन (Electrophile) का निर्माण करता है।
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पदार्थ की अवस्थाओं, प्लाज़्मा और बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) तथा परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लाज़्मा पदार्थ की वह अवस्था है जिसमें गैस अत्यधिक आयनीकृत होती है और इसमें स्वतंत्र रूप से गति करते हुए धनावेशित आयन तथा इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण यह विद्युत का सुचालक होता है और इस पर चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव पड़ता है।
2. बोस-आइंस्टीन संघनन (BEC) का निर्माण अत्यंत उच्च घनत्व वाली गैस को परम शून्य ताप ($0 \text{ K}$) के अत्यंत निकट तक ठंडा करके किया जाता है, जहाँ सभी कण एक ही क्वांटम अवस्था में संगमित हो जाते हैं।
3. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी को बिना किसी विक्षेपण के पार कर गए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है तथा उसका संपूर्ण धनावेश और द्रव्यमान उसके केंद्रीय भाग (नाभिक) में केंद्रित होता है।
4. बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किन्हीं भी वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं, और जब तक वे इन कक्षाओं में रहते हैं, उनकी ऊर्जा का विकिरण या ह्रास होता रहता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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