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History of India
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तुगलक वंश का अंतिम शासक कौन था जिसके समय साम्राज्य केवल दिल्ली से पालम तक रह गया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
नसीरुद्दीन महमूद तुगलक वंश का अंतिम नाममात्र का शासक था।
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित सामाजिक-धार्मिक सुधार संगठनों और उनके संस्थापकों/प्रमुख कार्यकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सत्यशोधक समाज (1873) — ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना और सामाजिक समता स्थापित करना था।
2. आर्य समाज (1875) — स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बॉम्बे में स्थापित, जिसका मूल मंत्र 'वेदों की ओर लौटो' था और इसने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू धर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
3. साधारण ब्रह्म समाज (1878) — आनंदमोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्विजनाथ गांगुली द्वारा स्थापित, जो केशव चंद्र सेन की अल्पायु में पुत्री के विवाह और रूढ़िवादी कृत्यों के विरोध में मूल ब्रह्म समाज से अलग होकर बना था।
4. सेवा सदन (1885) — रामाबाई रानाडे और पंडित रमाबाई द्वारा पुणे में स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च जाति की बाल विधवाओं को शिक्षित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने अपनी इच्छा से स्वयं आगे बढ़कर इस विद्रोह का नेतृत्व संभाला था और वह अंग्रेजों के विरुद्ध सैन्य अभियानों की योजना बनाने वाले मुख्य रणनीतिकार थे।
2. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान जनरल बख्त खान के हाथों में थी, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और जिन्हें सम्राट ने 'साहिब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि से सम्मानित किया था।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के बाद मेजर विलियम हडसन ने बहादुर शाह जफर को हुमायू के मकबरे से गिरफ्तार किया तथा उनके दो पुत्रों और एक पोते को गोली मारकर हत्या कर दी थी।
4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें निर्वासित कर रंगून (बर्मा) भेज दिया, जहाँ वर्ष 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जहाँगीर के शासनकाल में 1626 ई. में किसने विद्रोह कर सुल्तान को झेलम नदी के तट पर बंदी बना लिया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति के संबंध में विभिन्न विचारकों द्वारा दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न होकर एक राष्ट्रीय विरोध (National Revolt) था, क्योंकि इसके व्यापक समर्थन में ग्रामीण जनता और पारंपरिक समाज भी शामिल था।
2. इतिहासकार लॉरेंस और सीले (Sir John Seeley) ने इसे पूर्णतः 'स्वदेशी और देशभक्ति से रहित एक स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका भारतीय जनता से कोई सरोकार नहीं था।
3. बीडी सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इसे सुनियोजित और संगठित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया, जबकि डॉ. आरसी मजूमदार ने इसे 'न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम' माना।
4. कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने इसे केवल सामंती तत्वों का प्रतिक्रियावादी संघर्ष माना, जिसे आधुनिकता और प्रगति के विरुद्ध पारंपरिक शक्तियों की अंतिम छटपटाहट बताया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के विभिन्न पहलुओं, दार्शनिकधाराओं तथा उनके संतों के योगदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को बौद्ध और जैन धर्म के प्रभाव को समाप्त करने के लिए अलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) संतों द्वारा आगे बढ़ाया गया, जिन्होंने तमिल भाषा में रचित अपने भजनों (जैसे 'नालायिर दिव्य प्रबंधम' और 'तेवारम') के माध्यम से भक्ति का प्रसार किया और जातिगत भेदभाव को चुनौती दी।
2. सूफी सिलसिलों के शुरुआती दौर में 'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत कानूनों के नियमों और बंधनों का कड़ाई से पालन करने वाले, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (शरीयत के बंधन से स्वतंत्र रहने वाले, जिन्हें 'मदर्स' या मस्त फकीर भी कहा जाता था) नामक दो प्रमुख धाराएं विकसित हुई थीं।
3. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य और उत्तराधिकारी शेख निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत के एक रूप 'समां' को अपनी आध्यात्मिक साधना का अभिन्न अंग बनाया था, जिनके उदार दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर के प्रिय) की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
4. भक्ति संत कबीर दास और रामानंद ने निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं का समन्वय करते हुए रूढ़िवादी ब्राह्मणवाद, जाति व्यवस्था और बाह्य आडंबरों (जैसे मूर्तिपूजा और तीर्थयात्रा) का खंडन किया, तथा कबीर के उपदेश उनके शिष्यों द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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