त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
खिज्र खाँ ने सुल्तान की उपाधि न धारण कर स्वयं को किस पदवी से संतुष्ट रखा?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
खिज्र खाँ ने तैमूर के प्रतिनिधि के रूप में स्वयं को रैयत-ए-आला कहा।
Related Questions
→
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, आर्थिक प्रबंध तथा सम्राट अशोक के धम्म और अभिलेखीय साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में खानों (Mines) के विभागाध्यक्ष को 'अकराध्यक्ष' तथा मुद्रा और टकसाल के अधिकारी को 'लक्षण अध्यक्ष' कहा जाता था।
2. अशोक के रुम्मिदेई (लुम्बिनी) अभिलेख के अनुसार सम्राट अशोक ने बुद्ध के जन्मस्थान होने के कारण वहाँ के भू-राजस्व (भाग) की दर को सामान्य एक-छठे भाग से घटाकर एक-आठवां (1/8) कर दिया था और धार्मिक कर 'बलि' को पूरी तरह माफ कर दिया था।
3. मौर्य प्रशासन के प्रांतीय विभाजन के अंतर्गत दक्षिणापथ की राजधानी सुवर्णगिरि थी, जबकि अवंती राष्ट्र की राजधानी उज्जैनी थी, और इन प्रांतों के प्रशासन का संचालन राजपरिवार के किसी सदस्य ('कुमार' या 'आर्यपुत्र') द्वारा किया जाता था।
4. अशोक के सातवें स्तंभ लेख में 'धम्म महामात्रों' के कर्तव्यों का व्यापक विवरण मिलता है, जिनका मुख्य दायित्व विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना था कि सम्राट के कल्याणकारी संदेश समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक विकास, संगीतों और उनके ऐतिहासिक ग्रंथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रणेता आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादन किया कि सभी वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के कारण स्वभाव से शून्य (निःस्वभाव) हैं, जबकि जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का निर्धारण सात अलग-अलग दृष्टिकोणों (सप्तभंगी नय) से किया जाता है।
2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियां इसी जन्म में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त कर सकती हैं और उनके 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस तथ्य का पूर्ण खंडन करता है कि कोई स्त्री इसी जन्म में मोक्ष प्राप्त कर सकती है।
3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' (Maitreya) की कल्पना की गई है, जो इस कल्प के अंतिम बुद्ध होंगे, तथा जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का स्पष्ट उल्लेख ऋग्वेद में भी प्राप्त होता है।
4. चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कुण्डलनवन (कश्मीर) में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था, जिसके उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए विद्रोह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अवध में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को नवाब घोषित करके किया था, तथा उन्होंने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और वे अपनी उत्कृष्ट सैन्य रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते थे।
3. ब्रिटिश कमांडर सर कॉलिन कैंपबेल ने अंततः मार्च 1858 में गोरखा रेजिमेंट की सहायता से लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसके उपरांत बेगम हजरत महल ने नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं शरण ली थी।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायां के एक स्थानीय राजा की गद्दारी के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ब्रिटिश शासनकाल में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को जमींदारों के लिए स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, लेकिन कुल वसूले गए राजस्व का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा ईस्ट इंडिया कंपनी को तथा मात्र 11 प्रतिशत हिस्सा जमींदारों के प्रशासनिक खर्च और लाभ के रूप में रखा गया था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और काश्तकार (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें किसानों को भूमि का स्वामित्व प्राप्त हुआ और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भू-राजस्व का भुगतान करना पड़ता था।
3. महालवारी व्यवस्था, जिसे मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू किया गया था, के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण व्यक्तिगत किसानों के स्तर पर न होकर संपूर्ण गाँव या 'महाल' के आधार पर किया जाता था, और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी जाती थी।
4. इन सभी भू-राजस्व प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि का आधुनिकीकरण करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक पूंजी निवेश को बढ़ावा देना था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यधिक समृद्ध हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा की भारत की दूसरी यात्रा (वर्ष 1502) के दौरान उसने कोचीन में पुर्तगालियों की पहली फैक्ट्री या कारखाने की स्थापना की थी, जबकि पुर्तगालियों द्वारा भारत में निर्मित पहला दुर्ग 'सैन एंजेलो किला' कन्नूर में बनाया गया था।
2. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक एकाधिकार सुनिश्चित करना था।
3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया था और पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया था।
4. नुनीकुओ (Nuno da Cunha) के गवर्नर बनने के बाद पुर्तगालियों ने वर्ष 1530 में अपना आधिकारिक मुख्यालय कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा बना लिया तथा हुगली और बेसिन के क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव फैलाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.