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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, आर्थिक प्रबंध तथा सम्राट अशोक के धम्म और अभिलेखीय साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में खानों (Mines) के विभागाध्यक्ष को 'अकराध्यक्ष' तथा मुद्रा और टकसाल के अधिकारी को 'लक्षण अध्यक्ष' कहा जाता था।
  2. 2. अशोक के रुम्मिदेई (लुम्बिनी) अभिलेख के अनुसार सम्राट अशोक ने बुद्ध के जन्मस्थान होने के कारण वहाँ के भू-राजस्व (भाग) की दर को सामान्य एक-छठे भाग से घटाकर एक-आठवां (1/8) कर दिया था और धार्मिक कर 'बलि' को पूरी तरह माफ कर दिया था।
  3. 3. मौर्य प्रशासन के प्रांतीय विभाजन के अंतर्गत दक्षिणापथ की राजधानी सुवर्णगिरि थी, जबकि अवंती राष्ट्र की राजधानी उज्जैनी थी, और इन प्रांतों के प्रशासन का संचालन राजपरिवार के किसी सदस्य ('कुमार' या 'आर्यपुत्र') द्वारा किया जाता था।
  4. 4. अशोक के सातवें स्तंभ लेख में 'धम्म महामात्रों' के कर्तव्यों का व्यापक विवरण मिलता है, जिनका मुख्य दायित्व विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना था कि सम्राट के कल्याणकारी संदेश समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक और आर्थिक इतिहास के संदर्भ में उपर्युक्त में से कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः सही हैं, जबकि कथन 2 तकनीकी रूप से आंशिक रूप से त्रुटिपूर्ण है। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में विभिन्न विभागों के अध्यक्षों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जहाँ 'अकराध्यक्ष' खानों का प्रमुख और 'लक्षण अध्यक्ष' टकसाल का अधिकारी था। प्रांतीय प्रशासन में सुवर्णगिरि (दक्षिणापथ) और उज्जैनी (अवंती) प्रमुख प्रांतीय राजधानियाँ थीं, जिनका प्रबंधन 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' करते थे। अशोक के सातवें स्तंभ लेख में धम्म महामात्रों के कार्यों का विवरण मिलता है। हालांकि, रुम्मिदेई अभिलेख के अनुसार अशोक ने लुम्बिनी में 'भाग' (भू-राजस्व) को 1/6 से घटाकर **1/8 (एक-आठवां)** अवश्य किया था, किंतु 'बलि' (जो एक धार्मिक या पारंपरिक कर था) को पूरी तरह माफ करने के स्थान पर उसने धार्मिक कर 'उद्भाग' या अन्य करों में छूट दी थी, इसलिए दूसरा कथन पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। मौर्य साम्राज्य की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन से संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली - जॉन निकलसन 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम 3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक 4. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? यूरोपीय कंपनियों के आगमन और पुर्तगाली-ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक 'जमूरिन' ने उसका स्वागत किया, जबकि कालीकट के तटीय व्यापार पर एकाधिकार जमाने वाले अरब व्यापारियों ने पुर्तगालियों के इस प्रवेश का कड़ा विरोध किया था। 2. पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क (Alfonso de Albuquerque) को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नौसेना का मुख्य केंद्र बनाया और क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ पुर्तगालियों को भारतीय स्त्रियों से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया। 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के समय मुगल सम्राट जहाँगीर ने कैप्टन विलियम हॉकिंस को 'अंग्रेज खान' की उपाधि से सम्मानित करते हुए सूरत में एक स्थायी कारखाना स्थापित करने की तुरंत शाही अनुमति प्रदान कर दी थी, जिससे पुर्तगालियों का प्रभाव तुरंत समाप्त हो गया था। 4. भारत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के शासनकाल में मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, और उन्होंने अपना पहला कारखाना 1668 में फ्रैंक कैरो के निर्देशन में सूरत में स्थापित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व, प्रशासनिक संरचना और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के पश्चात, जफर ने इस विद्रोह का प्रत्यक्ष सैन्य संचालन स्वयं अपने हाथों में ले लिया था और सभी विद्रोही सेनापतियों के लिए व्यक्तिगत रूप से युद्ध रणनीतियाँ तैयार की थीं। 2. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य संचालन एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स' (Court of Administrators) के अधीन था, जिसमें छह सैन्य और चार नागरिक सदस्यों की एक परिषद शामिल थी, और यह परिषद सम्राट के नाम पर निर्णय लेती थी। 3. दिल्ली पर पुनरधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर हुए भीषण संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? महात्मा गांधी के भारत आगमन के उपरांत उनके शुरुआती सत्याग्रहों — चंपारण (1917), अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के कुल भूभाग के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना बाध्यकारी था। 2. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) में गांधीजी ने मिल मालिकों और मजदूरों के बीच मध्यस्थता करते हुए पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) को अपने एक प्रभावी हथियार के रूप में प्रयोग किया था, जो प्लेग बोनस को लेकर था। 3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व वसूलने के निर्णय के विरुद्ध गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने का आह्वान किया था, और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधीजी के मुख्य सहयोगी के रूप में कार्य किया था। 4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से अत्यधिक प्रभावित होकर रबीन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इस आंदोलन की जांच के लिए गठित 'चंपारण अग्रियन कमेटी' (Champaran Agrarian Committee) में गांधीजी को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहनशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के पश्चात, जफर ने तुरंत इस नेतृत्व को स्वीकार करते हुए सक्रिय रूप से सैन्य रणनीतियों की कमान अपने हाथों में ले ली थी। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर स्वयं इस विद्रोह में प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय नहीं होना चाहते थे और विद्रोही सैनिकों के दबाव में आकर उन्होंने इसका नेतृत्व स्वीकार किया था, फिर भी दिल्ली के पतन के बाद अंग्रेजों द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया था। 3. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक सैन्य नेतृत्व जनरल बख्त खान के पास था, जो बरेली से आने वाली विद्रोही सेना का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने सम्राट के नाम पर प्रशासन तथा सैन्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया था। 4. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन के नेतृत्व में लंबी घेराबंदी और भीषण संघर्ष के बाद सितंबर 1857 में अंग्रेजों ने पुनः दिल्ली पर अधिकार कर लिया, जहाँ कर्नल हडसन द्वारा राजकुमारों की हत्या कर दी गई और जफर पर मुकदमा चलाया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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