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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पॉल पावलेव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विलोपन या एक्सटिंक्शन' (Extinction)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत यदि किसी अनुबंधित उद्दीपक (Conditioned Stimulus) के बार-बार प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उसके साथ अस्वाभाविक या मूल अनकंडीशंड उद्दीपक (Unconditioned Stimulus) को नहीं जोड़ा जाता है, तो अनुबंधित अनुक्रिया (Conditioned Response) की तीव्रता धीरे-धीरे कम होते-होते अंततः समाप्त हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अवांछित व्यवहारों के शमन, आदत में सुधार और पुनरुत्पादन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत में 'विलोपन' (Extinction) वह प्रक्रिया है जिसमें अनुबंधित उद्दीपक (जैसे घंटी) के साथ प्राकृतिक उद्दीपक (जैसे भोजन) का साथ छू जाने पर अनुबंधित अनुक्रिया (जैसे लार आना) धीरे-धीरे कमजोर होकर बंद हो जाती है। कक्षा-शिक्षण के संदर्भ में, यदि शिक्षक विद्यार्थियों के किसी अवांछित या नकारात्मक व्यवहार को मिलने वाले ध्यान या पुरस्कार (जो सुदृढ़क का कार्य कर रहे हैं) को हटा लेते हैं, तो वह अवांछित व्यवहार धीरे-धीरे विलोपित (समाप्त) हो जाता है। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय का सबसे सटीक और वैज्ञानिक कक्षा-कक्षीय निहितार्थ प्रस्तुत करता है।
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→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights)**—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Morality) के स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह मानता है कि कानून और नियम कठोर और अपरिवर्तनीय नहीं हैं, बल्कि वे समाज के कल्याण के लिए लोगों के बीच एक आपसी सहमति (Contract) या अनुबंध हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या सामाजिक न्याय के खिलाफ जाता है, तो उसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव किया जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक नैतिक विवेक, लोकतांत्रिक दृष्टिकोण और न्यायबोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'सम्बन्धात्मक अधिगम सिद्धांत' (Connectionism Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी अनुक्रिया (Response) के बाद यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (Pleasurable Consequence) प्राप्त होते हैं, तो उस उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) बंध या संबंध की मजबूती में वृद्धि होती है, और यदि असंतोषजनक या कष्टप्रद परिणाम प्राप्त होते हैं, तो उस संबंध का क्षय या कम होना तय होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, आदतों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? 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