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History of India
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सैयद और लोदी काल में सैन्य संगठन का मुख्य दोष क्या था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सामंती आधारित सेना होने के कारण सुल्तान कमजोर थे।
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ऋग्वैदिक कालीन समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (दुहने वाली) शब्द पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था, जो यह दर्शाता है कि गायों के दोहन का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता था, और इस काल में समाज स्पष्ट रूप से पितृसत्तात्मक होने के बावजूद महिलाओं को सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने की स्वतंत्रता थी।
2. इस काल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पशुपालन पर आधारित थी, जहाँ गाय सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान संपत्ति मानी जाती थी, तथा युद्धों का मुख्य कारण भूमि या क्षेत्र का विस्तार न होकर 'गविष्टि' (गायों की खोज या गायों के लिए युद्ध) होता था।
3. ऋग्वैदिक कबीले के मुखिया को 'राजन्' कहा जाता था, जो भूमि का स्वामी होता था और करों (बलि) को नियमित रूप से अनिवार्य रूप से वसूलता था, जिसे जनता द्वारा राजा को देना कानूनी रूप से बाध्यकारी था।
4. ऋग्वैदिक देवताओं में इन्द्र को 'पुरंदरा' (किले को तोड़ने वाला) कहा गया है, जिन्हें सबसे अधिक 250 सूक्त समर्पित हैं, जबकि अग्नि को मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में देखा जाता था जिन्हें 200 सूक्त समर्पित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके रणनीतिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में स्वयं को पेशवा घोषित किया और मराठा प्रभुसत्ता को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, तथा ब्रिटिश सेना के विरुद्ध युद्ध संचालन के लिए उन्होंने तात्या टोपे को अपना मुख्य सैन्य कमांडर नियुक्त किया था।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के एक अत्यंत चतुर और विश्वसनीय सलाहकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष नाना साहब की पेंशन का मामला अत्यंत प्रभावशाली ढंग से रखा था, और कानपुर में विद्रोह के समय उन्होंने विद्रोही सैनिकों तथा विदेशी ताकतों के मध्य गुप्त कूटनीतिक समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के उपरांत 'सतीचौरा घाट' पर घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, जब अंग्रेजों ने जनरल हैवलॉक और जनरल नील के नेतृत्व में भीषण दमन किया, तब नाना साहब कालपी की ओर प्रस्थान कर गए और अंततः नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ उनका अंतिम जीवन इतिहास में अज्ञात रहा।
4. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य गतिविधियों का दायरा समेट लिया और अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने उन्हें माफ कर दिया और वे जीवन के अंतिम दिनों तक पेंशन भोगी के रूप में कानपुर में ही रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों (मोनोलिथिक सप्तपगोडा) का निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया था।
2. बादामी के चालुक्य वंश के सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय की नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन के साथ हुए युद्ध में हार हुई थी, जिसकी विस्तृत जानकारी हमें हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' अभिलेख से प्राप्त होती है।
3. चोल साम्राज्य के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन (ग्राम प्रशासन) की अनूठी प्रणाली उत्तरैमरूर अभिलेखों से ज्ञात होती है, जहाँ ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुरावलाई' (लॉटरी या पर्ची प्रणाली) पद्धति का प्रयोग किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे 'स्वदेशी आंदोलन' के घटनाक्रम, कार्यपद्धति तथा उसके वैचारिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड कर्ज़न द्वारा बंगाल के विभाजन का आधिकारिक निर्णय 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य तत्कालीन राष्ट्रवादी राजनीति के केंद्र बंगाल की राजनीतिक सक्रियता को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर प्रांत का विभाजन करना था।
2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया तथा इसी अधिवेशन में प्रसिद्ध गीत 'बंदे मातरम' को आंदोलन का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बनाया गया।
3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने के दिन (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी और 'अमार सोनार बांग्ला' गीत गाते हुए सड़कों पर मार्च निकाला।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में हुए प्रयासों के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन (राष्ट्रीय शिक्षा परिषद) की स्थापना वर्ष 1906 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी शिक्षा का बहिष्कार कर केवल पारंपरिक वैदिक शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के प्रावधानों तथा उसके क्रियान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में यह निर्णय लिया गया कि दोनों प्रांतों का विभाजन किया जाए या नहीं, इसके लिए मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों द्वारा अलग-अलग मतदान (Separate Voting) किया जाएगा।
2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसमें शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) आयोजित किया गया था, जिसमें सिलहट ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था।
3. रियासतों (Princely States) के भविष्य के संबंध में माउंटबेटन योजना में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि वे या तो भारत डोमिनियन या पाकिस्तान डोमिनियन में शामिल हो सकती हैं, अथवा वे अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में भी रह सकती हैं।
4. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 को ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित किया गया, जिसके माध्यम से 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियंस के सृजन को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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