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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण की अवधारणा' (Concept of Conservation)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझने में सक्षम हो जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, विन्यास (Arrangement) या दिखावे में परिवर्तन होने के बावजूद उसकी मात्रा, द्रव्यमान, आयतन या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन (Concrete Operational Thought), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और विकेंद्रीकरण (Decentration) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) के दौरान विकसित होती है। इस अवस्था में बालक दिखावे (Appearance) से भ्रमित होना बंद कर देता है और विकेंद्रीकरण (Decentration - एक से अधिक आयामों पर एक साथ ध्यान केंद्रित करना) तथा उत्क्रमणीयता (Reversibility - क्रिया को मानसिक रूप से उलट सकने की क्षमता) के माध्यम से यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के रूप बदलने पर भी उसकी मूल मात्रा (जैसे द्रव्यमान, आयतन, संख्या) अपरिवर्तित रहती है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उस उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-conventional Level) के चरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून लचीले सामाजिक अनुबंध हैं जिन्हें जनता के कल्याण और लोकतांत्रिक सहमति के आधार पर बदला जाना चाहिए, और वैयक्तिक मानवाधिकार तथा न्याय की भावना किसी भी कठोर संस्थागत नियम या वैधानिक आज्ञाकारिता से सर्वोपरी होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तर्कों, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक चेतना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level)** के भीतर आने वाला **'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights)** का चरण—जिसे उस उच्च नैतिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज की भलाई के लिए एक लचीले सामाजिक अनुबंध (Social Contract) के रूप में होने चाहिए, और यदि कोई कानून किसी बुनियादी मानवाधिकार या न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, तो उसे लोकतांत्रिक और तार्किक प्रक्रियाओं के माध्यम से बदला जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तार्किकता (Moral Reasoning), लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? 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