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History of India
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पुर्तगाली यात्री "डोमिंगो पायस" और "बारबोसा" किसके शासनकाल में विजयनगर आए थे?

Detailed Explanation

ये यात्री कृष्णदेव राय के शासनकाल के दौरान भारत आए थे।
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गुप्तोत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था तथा आर्थिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भूमि अनुदान की प्रथा ('अग्रहार' व्यवस्था) में व्यापक वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप न केवल ब्राह्मणों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि दी गई, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों का भी स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण हुआ, जिससे सामंती प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला। 2. इस काल में हस्तशिल्प और आंतरिक व्यापार में अत्यधिक समृद्धि आई तथा रोमन साम्राज्य के साथ होने वाला समुद्री व्यापार अपने चरम पर पहुँच गया, जिसके कारण सोने के सिक्कों ('दीनार') का प्रचलन समाज के प्रत्येक वर्ग में सामान्य हो गया था। 3. गुप्तकालीन प्रशासन में राजा की सहायता के लिए 'मंत्रित्रीपरिषद' होती थी, जिसके सदस्यों को 'मंत्री' या 'अमात्य' कहा जाता था, और प्रांतों (देश या भुक्ति) के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में 'उपपरिक' नियुक्त किए जाते थे, जो सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी थे। 4. सुप्रसिद्ध खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट ने इसी काल में 'आर्यभट्रीय' और 'सूर्यसिद्धांत' की रचना की, तथा उन्होंने सर्वप्रथम यह वैज्ञानिक प्रतिपादन किया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है जिससे दिन और रात होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों और उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ ने झाँसी की किलेबंदी को घेर लिया, जिसके दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अंग्रेजों का मुकाबला किया और कालपी की ओर प्रस्थान किया। 2. कालपी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहिब को पेशवा घोषित किया गया। 3. ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय के युद्ध में 18 जून 1858 को ब्रिटिश सेना से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे बच निकलने में सफल रहे और बाद में उन्हें एक जमींदार के विश्वासघात के कारण पकड़कर फाँसी दे दी गई। 4. तात्या टोपे ने झाँसी के पतन के पश्चात मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का सफल नेतृत्व किया था और उन्हें कभी भी ब्रिटिश सेना या उनके सहयोगियों द्वारा पकड़ा नहीं जा सका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसे 'कृष्ण अयस' कहा जाता था, जिसके प्रयोग से उन्होंने उत्तर भारत के जंगलों को साफ करके कृषि योग्य भूमि का विस्तार किया था। 2. उत्तर वैदिक काल में 'गोत्र' प्रथा की स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ 'वह स्थान जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन पाला जाता था' था, और इस काल में अंतरगोत्रीय विवाह (सगोत्र विवाह) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था। 3. ऋग्वैदिक समाज मूल रूप से कबीलाई और समतावादी था, जिसमें वर्ण व्यवस्था मुख्य रूप से जन्म पर आधारित न होकर कर्म और व्यवसाय पर आधारित थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में यह कठोरता से जन्म आधारित हो गई। 4. वैदिक साहित्य में संहिताओं (वेद) के अलावा ब्राह्मण ग्रंथों, आरण्यकों और उपनिषदों को शामिल किया जाता है, जिनमें 'उपनिषद' को 'वेदांत' भी कहा जाता है क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं और इनका मुख्य जोर दार्शनिक चिंतन तथा ज्ञान मार्ग पर है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की कला, वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम 'महामल्ल' के शासनकाल में करवाया गया था, जबकि पल्लव वंश के ही राजसिंह (नरसिंहवर्मन द्वितीय) ने कांचीपुरम के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। 2. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और जीवंत ऐतिहासिक विवरण महाकवि रविचर्ति द्वारा रचित ऐहोल शिलालेख (प्रशस्ति) में प्राप्त होता है। 3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, जिसका विस्तृत उल्लेख उत्तरमेरूर अभिलेखों में मिलता है, के अंतर्गत ग्राम सभाओं के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (घड़े की पर्ची) नामक अनूठी लोकतांत्रिक लॉटरी प्रणाली का प्रयोग किया जाता था। 4. हर्ष के कन्नौज धर्मसभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चीनी यात्री ह्वेनसांग को सभा का अध्यक्ष बनाया गया था, किंतु ह्वेनसांग की इस सर्वोच्च धार्मिक स्थिति से ईर्ष्यावश हीनयानियों और ब्राह्मणों ने सभा के पंडाल में आग लगाने का असफल षड्यंत्र रचा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल का वह प्रसिद्ध ग्रंथ "आईन-ए-अकबरी" और "अकबरनामा" के लेखक कौन हैं?
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