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History of India
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अकबर ने टोडरमल को "दीवान-ए-अश़रफ" का पद किस वर्ष दिया था?

Detailed Explanation

1580 ई. में यह पद दिया गया।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, जिसके कारण कृषि के विस्तार और सुधारों में जमींदारों की रुचि बहुत अधिक बढ़ गई थी और उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया था। 2. रयतवारी व्यवस्था के तहत मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) के पास था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें बहुत अधिक थीं और अकाल या फसल खराब होने की स्थिति में भी लगान माफी का कोई स्पष्ट या उदार प्रावधान नहीं था। 3. महालवारी व्यवस्था को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का औपनिवेशिक दोहन इस हद तक बढ़ गया कि किसान पूरी तरह से साहूकारों और महाजनों के ऋणजाल में उलझते चले गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अराविदु वंश के शासकों ने अपनी नई राजधानी कहाँ स्थापित की थी? 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश सेना में पुराने 'ब्राउन बेस' मस्कट के स्थान पर शामिल की गई नई 'एनफील्ड राइफल' के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी के प्रयोग की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न किया, क्योंकि इसे उनकी धार्मिक और जातीय आस्था पर सीधा प्रहार माना गया। 2. जनवरी 1857 में दमदम छावनी के एक लांस नायक ने ब्रिटिश अधिकारी के सामने यह खुलासा किया कि कारतूस के आवरण को दांतों से काटने से पहले उसे सूअर और गाय की चर्बी से चिकना किया जाता है, जिससे यह बात सेना में आग की तरह फैल गई। 3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बास और लेफ्टिनेंट बॉब पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 4. इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सैन्य अदालत द्वारा मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, तथा उनकी रेजिमेंट 34वीं एनआई को इस विद्रोह में संलिप्तता के कारण मई 1857 में आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (घोषणा पत्र) के वैधानिक और प्रशासनिक परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के अधीन स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें हड़पने की नीति ('व्यपगत सिद्धांत') का त्याग करती है, देशी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देती है और भविष्य में भारतीय भू-क्षेत्र का कोई विस्तार नहीं किया जाएगा। 3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, प्राचीन परंपराओं का सम्मान करने तथा नस्ल, वर्ण या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का खुला वादा किया। 4. विद्रोह के सफल दमन और प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात काफी घटा दिया और बंगाल सेना में राजपूतों, ब्राह्मणों तथा अवध के सैनिकों की संख्या बढ़ाकर ब्रिटिश रेजिमेंटों को पूरी तरह समाप्त कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज की भव्य धर्मसभा और प्रयाग के महामक्षपर्षद् (महामोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में विस्तृत वर्णन किया है। 2. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) के काल में करवाया गया था, और ये सभी मंदिर एकात्म पत्थर (Monolithic rock) को तराशकर बनाए गए वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं। 3. वातापी (बादामी) के चालुक्य वंश के सबसे महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका प्रत्यक्ष ऐतिहासिक साक्ष्य पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल शिलालेख (जिसे रविचर्ति ने संस्कृत में लिखा है) में मिलता है। 4. तंजौर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविण वास्तुकला की नागर शैली का एक प्रमुख और प्रारंभिक उदाहरण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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