त्वरित लिंक्स
History of India
9 views
ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, जिसके कारण कृषि के विस्तार और सुधारों में जमींदारों की रुचि बहुत अधिक बढ़ गई थी और उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया था।
- 2. रयतवारी व्यवस्था के तहत मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) के पास था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें बहुत अधिक थीं और अकाल या फसल खराब होने की स्थिति में भी लगान माफी का कोई स्पष्ट या उदार प्रावधान नहीं था।
- 3. महालवारी व्यवस्था को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
- 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का औपनिवेशिक दोहन इस हद तक बढ़ गया कि किसान पूरी तरह से साहूकारों और महाजनों के ऋणजाल में उलझते चले गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि स्थाई बंदोबस्त के अंतर्गत यद्यपि राजस्व की मांग जमींदारों के लिए निश्चित कर दी गई थी, किंतु जमींदारों ने कृषि सुधारों या किसानों के कल्याण के लिए कोई पूंजी निवेश नहीं किया। वे केवल एक बिचौलिए की तरह लगान वसूलने का कार्य करते थे और 'सूर्यास्त कानून' के डर से किसानों का अत्यधिक शोषण करते थे। कथन 2, 3 और 4 बिल्कुल सही हैं; रयतवारी व्यवस्था में सीधा संपर्क था किंतु दरें अत्यधिक थीं, महालवारी व्यवस्था में सामूहिक जिम्मेदारी का प्रावधान था, और इन नीतियों के कारण भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ जिससे ग्रामीण ऋणग्रस्तता तेजी से बढ़ी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बैस बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बास् और लेफ्टिनेंट बॉग पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।
3. मंगल पांडे को इस कृत्य के लिए 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में सरेआम फाँसी पर लटका दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सेना के भीतर भारी आक्रोश फैल गया और इस घटना ने विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार कर दी।
4. बैरकपुर की इस घटना के तुरंत बाद मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को 3rd लाइट कैवलरी के सैनिकों ने सामूहिक रूप से खुलेआम विद्रोह का बिगुल बजा दिया और दिल्ली की ओर कूच कर गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का मंत्रिपरिषद) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, जिसमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री का पद संभालता था, किंतु अष्टप्रधान के सभी सदस्य वंशानुगत होते थे और उन्हें राजा के सैनिक अभियानों में भाग लेना अनिवार्य था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाते हुए माप की प्रणाली ('काठी' और 'मान') को अपनाया, तथा राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर) नामक कर वसूल करने की प्रणाली विकसित की।
3. मराठा नौसेना (Navy) का सुदृढ़ीकरण शिवाजी की एक दूरदर्शी सैन्य नीति का हिस्सा था, जिसके तहत उन्होंने कोलाबा, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा पश्चिमी तट पर जंजीरा के सिद्दी और विदेशी ताकतों (पुर्तगालियों और अंग्रेजों) की नौसैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
4. शिवाजी के उत्तराधिकार के काल में वर्ष 1731 में 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) के द्वारा छत्रपति और पेशवा के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हो गया, जिसके तहत कोल्हापुर के छत्रपति (संभाजी द्वितीय) और सतारा के छत्रपति (शाहू प्रथम) के बीच मराठा राज्य की संप्रभुता का औपचारिक बंटवारा हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और उनके भौगोलिक तथा राजनीतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो अपने व्यापारिक महत्व के लिए प्रसिद्ध थी, और इस महाजनपद को मगध के शासक बिम्बिसार द्वारा विजित कर लिया गया था।
2. वज्जि संघ आठ कुलों का एक संघ (Confederacy) था, जिसमें लिच्छवि और विदेह सबसे प्रमुख थे, तथा इसकी राजधानी वैशाली थी जो विश्व के प्राचीनतम गणतंत्रों में से एक मानी जाती है।
3. अवंती महाजनपद दो भागों में विभाजित था—उत्तरी अवंती की राजधानी उज्जैन और दक्षिणी अवंती की राजधानी माहिष्मती थी, तथा यहाँ के राजा चंडप्रद्योत के साथ मगध शासक बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को चिकित्सा के लिए भेजा था।
4. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, और इसके शासक उदयन गौतम बुद्ध के समकालीन थे, जिनके राज्य का उल्लेख बौद्ध ग्रंथों में नहीं मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा का व्यापक विस्तार हुआ, जिसके तहत ब्राह्मणों और बौद्ध विहारों को दिए जाने वाले 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' अनुदानों में न केवल करों की छूट मिलती थी, बल्कि कई मामलों में प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी स्थानीय अनुदानग्राहियों को हस्तांतरित कर दिए जाते थे।
2. इस काल में स्वर्ण मुद्राओं ('दीनार') का प्रचलन बड़े पैमाने पर हुआ, जो कुषाण स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक सुंदरता से भरपूर थीं, और ये मुद्राएँ मुख्य रूप से लंबी दूरी के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और बड़े व्यावसायिक लेन-देन के लिए उपयोग की जाती थीं।
3. गुप्त राजवंश के शासक मूल रूप से भागवत धर्म (वैष्णव धर्म) के अनुयायी थे और उन्होंने 'परमभागवत' की उपाधि धारण की, किंतु उनके साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता की नीति प्रचलित थी, जिसके अंतर्गत नालंदा महाविहार के बौद्ध संघ को भी भारी दान और संरक्षण प्रदान किया गया था।
4. गुप्तकालीन प्रशासन में 'कुमारमात्य' सबसे महत्वपूर्ण उच्च प्रशासनिक अधिकारी वर्ग था, जिनसे ही प्रांतों के 'उपर्युक्त' और जिलों के 'विषयपति' जैसे प्रमुख अधिकारी नियुक्त किए जाते थे, और कुछ मामलों में यह पद वंशानुगत भी हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, महाजनपद काल के दौरान वज्जि संघ (Vajjika League) की शासन प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.