जीन पियाजे
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पियाजे के अनुसार 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा का विकास मुख्य रूप से 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) के दौरान हो जाता है, जिसमें बच्चा यह समझ लेता है कि किसी वस्तु के रूप या आकार में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
- 2. 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का गुण 'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसके विकसित होने पर बच्चा यह समझने लगता है कि वस्तुएं तब भी अस्तित्व में रहती हैं जब वे उसकी दृष्टि से ओझल हो जाती हैं।
- 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) लगभग 11-12 वर्ष की आयु से शुरू होती है, जिसमें किशोरों में 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetical-Deductive Reasoning) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है।
- 4. पियाजे का मानना था कि बच्चे अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं सक्रिय रूप से करते हैं, और उनके चिंतन का स्वरूप वयस्कों की तुलना में केवल मात्रात्मक (Quantitatively) रूप से भिन्न होता है, गुणात्मक (Qualitatively) रूप से नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, कथन 1 गलत है क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा का विकास पूर्व संक्रियात्मक अवस्था में नहीं, बल्कि 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, 7-11 वर्ष) के दौरान होता है। पूर्व संक्रियात्मक अवस्था के बच्चों में 'केंद्रीयकरण' (Centration) का दोष पाया जाता है। कथन 4 भी गलत है क्योंकि पियाजे के अनुसार बच्चों का चिंतन वयस्कों से केवल मात्रात्मक रूप से नहीं, बल्कि गुणात्मक रूप से (Qualitatively) भिन्न होता है। इसके विपरीत, कथन 2 (वस्तु स्थायित्व - संवेदी गामक अवस्था) और कथन 3 (औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में अमूर्त चिंतन व निगमनात्मक तर्क) बिल्कुल सही हैं। अतः सही विकल्प (b) है।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'अनौपचारिक चिंतन' या 'अहंकेंद्रीकरण' (Egocentrism) की भावना पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) की एक मुख्य विशेषता है, जिसमें बच्चा यह समझता है कि दूसरे व्यक्ति भी उसी तरह सोचते और महसूस करते हैं जैसे वह खुद करता है।
2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालकों में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे वे किसी वस्तु या समस्या को केवल एक ही आयाम के बजाय एक साथ कई आयामों से देखने और समझने में सक्षम होते हैं।
3. पियाजे के सिद्धांत में 'आत्मसातीकरण' (Assimilation) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत बालक अपने पूर्व-ज्ञान या स्कीमा (Schema) में बिना किसी बदलाव के नए अनुभवों या सूचनाओं को समायोजित करता है।
4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष से वयस्कता) में बालक 'निगमनात्मक चिंतन' (Deductive Reasoning) और अमूर्त परिकल्पनाओं के आधार पर तर्क करने की उच्च मानसिक क्षमता प्राप्त कर लेता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास एक निरंतर प्रक्रिया न होकर चरणों (Stages) में होने वाली क्रमिक प्रक्रिया है, और इन चरणों का क्रम सार्वभौमिक (Universal) होता है जिसे बदला नहीं जा सकता।
2. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने से उसकी मात्रा या आयतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक तार्किक चिंतन तो करने लगता है, लेकिन उसका यह चिंतन केवल प्रत्यक्ष या ठोस (Concrete) वस्तुओं तक ही सीमित होता है, वह अमूर्त या काल्पनिक समस्याओं पर विचार नहीं कर पाता है।
4. पियाजे के सिद्धांत में 'सन्तुलनीकरण' (Equilibration) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बालक नए अनुभवों और पुराने ज्ञान (आत्मसातीकरण तथा समायोजन) के बीच संज्ञानात्मक संतुलन स्थापित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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