Child Development
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अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) में Deficiency Needs (D-needs) और Growth Needs (B-needs) के बीच के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक अंतर का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प मैस्लो के इस सिद्धांत के उस मूल मर्म को सर्वाधिक सटीक रूप से दर्शाता है जो 'कमी आधारित आवश्यकताओं' से 'विकास आधारित आवश्यकताओं' की ओर संक्रमण को स्पष्ट करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अब्राहम मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत में, शुरुआती चार स्तरों—शारीरिक आवश्यकताएँ, सुरक्षा आवश्यकताएँ, अपनेपन और प्रेम की आवश्यकताएँ, तथा आत्म-सम्मान की आवश्यकताएँ—को 'कमी की आवश्यकताएँ' (Deficiency Needs या D-needs) कहा जाता है क्योंकि ये शरीर या मन में किसी चीज़ की कमी (Deficit) होने पर उत्पन्न होती हैं और उनकी पूर्ति होने पर तनाव कम होता है। इसके विपरीत, पाँचवें और सर्वोच्च स्तर—आत्म-सिद्धि (Self-actualization)—को 'विकास की आवश्यकताएँ' या 'हस्ती की आवश्यकताएँ' (Growth Needs या B-needs) कहा जाता है, जो किसी कमी से नहीं बल्कि व्यक्ति की आंतरिक क्षमताओं और व्यक्तित्व के पूर्ण विकास की सकारात्मक इच्छा से प्रेरित होती हैं। इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अब्राहम मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs Theory) में 'कमी आधारित आवश्यकताओं' (Deficiency Needs या D-Needs) और 'विकास आधारित आवश्यकताओं' (Growth Needs या B-Needs) का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इन दोनों श्रेणियों के मध्य पाए जाने वाले उस दार्शनिक एवं प्रेरणात्मकीय अंतर को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है जो मानव प्रेरणा की दिशा को निर्धारित करता है?
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व्यक्तित्व के शील गुण सिद्धांतों (Trait Theories of Personality) के अंतर्गत, गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) ने व्यक्तित्व के शील गुणों को तीन स्तरों — कार्डिनल (Cardinal), केंद्रीय (Central), और द्वितीयक (Secondary) शील गुणों — में वर्गीकृत किया है। यदि कोई ऐतिहासिक या काल्पनिक व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन, प्रत्येक विचार और सभी व्यवहारों से केवल एक ही अत्यधिक प्रभावी और सर्वव्यापी प्रेरणा (जैसे अत्यधिक सत्ता की लालसा या परोपकार की पराकाष्ठा) से संचालित होता है, जो उसके व्यक्तित्व की पहचान बन जाती है, तो ऑलपोर्ट के इस वर्गीकरण के अनुसार ऐसे शील गुण को किस श्रेणी में रखा जाएगा और इसकी क्या मनोवैज्ञानिक विशेषता है?
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कार्ल जुंग (Carl Jung) द्वारा प्रतिपादित विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान (Analytical Psychology) के अंतर्गत व्यक्तित्व के मनोवैज्ञानिक प्रकारों (Psychological Types) का वर्गीकरण अंतर्मुखता (Introversion) और बहिर्मुखता (Extraversion) के आधार पर किया गया है। इसके अतिरिक्त, जुंग ने चार मूलभूत मनोवैज्ञानिक कार्यों — चिंतन (Thinking), अनुभूति (Feeling), संवेदन (Sensing), और अंतःप्रेरणा (Intuition) — को भी इसमें सम्मिलित किया है। यदि कोई व्यक्ति किसी दार्शनिक या वैज्ञानिक समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह से अपने आंतरिक विचारों, तर्कों, अमूर्त सिद्धांतों और आत्म-विश्लेषण पर निर्भर रहता है तथा बाहरी दुनिया की सामाजिक स्वीकृति की न्यूनतम परवाह करता है, तो जुंग के वर्गीकरण के अनुसार उसका व्यक्तित्व किस विशिष्ट प्रकार के अंतर्गत आएगा?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत, 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level) के द्वितीय चरण यानी 'प्राधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिविन्यास' (Authority and Social-Order Maintaining Orientation / Stage 4) का सूक्ष्म विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की वास्तविक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन विकास के 'समीप - दूराभिमुख' सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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