जीन पियाजे
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की एक प्रमुख विशेषता 'संरक्षण की कमी' (Lack of Conservation) और 'केंद्रण' (Centration) है। यदि एक बच्चे को समान मात्रा में दो अलग-अलग चौड़े और लंबे गिलासों से एक लंबे और पतले गिलास में पानी डालते समय यह लगता है कि लंबे गिलास में पानी की मात्रा बढ़ गई है, तो पियाजे के अनुसार बच्चे की यह सोच निम्नलिखित में से किस मुख्य संज्ञानात्मक सीमा को दर्शाती है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2 से 7 वर्ष) में बच्चों में 'केंद्रण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है, जिसका अर्थ है कि वे किसी वस्तु या घटना के केवल एक ही पहलू पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और अन्य पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके साथ ही उनमें 'अपलटावी' (Irreversibility) का दोष होता है, यानी वे यह समझने में असमर्थ होते हैं कि किसी प्रक्रिया को विपरीत दिशा में भी दोहराया जा सकता है। इसी कारण वे 'संरक्षण' (Conservation) के सिद्धांत को नहीं समझ पाते। विकिपीडिया संदर्भ
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