हंस आइजेंक (Hans Eysenck) द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व के त्रि-आयामी (Dimension) या जैविक-कारक सिद्धांत के अंतर्गत 'अंतर्मुखी-बहिर्मुखी' (Extraversion-Introversion), 'मनस्ताप या तंत्रिकाताप' (Neuroticism-Stability) और 'मनोविकृतिवाद' (Psychoticism) का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि कोई व्यक्ति उच्च न्यूरोटिकिज्म और उच्च अंतर्मुखता का संयोजन प्रदर्शित करता है, तो आइजेंक के पेन (PEN) मॉडल के अनुसार उस व्यक्ति के व्यवहार और जैविक-अनुवांशिकीय प्रवृत्ति (जैसे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की संवेदनशीलता) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
Detailed Explanation
हंस आइजेंक ने व्यक्तित्व के जैविक-कारक सिद्धांत (PEN Model) का प्रतिपादन किया था, जिसमें उन्होंने व्यक्तित्व को मुख्य रूप से तीन आयामों—Extraversion (बहिर्मुखता), Neuroticism (मनस्ताप) और Psychoticism (मनोविकृतिवाद) में वर्गीकृत किया है। आइजेंक के अनुसार, अंतर्मुखी व्यक्तियों में कोर्टिकल उत्तेजना (Cortical Arousal) का स्तर स्वाभाविक रूप से उच्च होता है, जिसके कारण वे अत्यधिक संवेगात्मक उद्दीपन से बचना चाहते हैं। वहीं, उच्च न्यूरोटिकिज्म (संवेगात्मक अस्थिरता) वाले व्यक्ति ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की तीव्र प्रतिक्रियाशीलता के कारण अत्यधिक चिंता, तनाव और भय के प्रति संवेदनशील होते हैं। इस प्रकार, उच्च अंतर्मुखता और उच्च न्यूरोटिकिज्म का संयोजन व्यक्ति को अत्यधिक संवेगात्मक रूप से संवेदनशील और चिंताग्रस्त बनाता है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।