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History of India
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जहाँगीर की मृत्यु के बाद नूरजहाँ ने अपना शेष जीवन कहाँ बिताया?

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नूरजहाँ ने लाहौर में अपना शेष जीवन बिताया था।
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सल्तनत काल के प्रशासनिक ढांचे को पूर्णतः समाप्त कर नई मुगल प्रशासनिक व्यवस्था किसने लागू की? गुप्तकालीन और मौर्योत्तर प्रशासनिक व्यवस्था तथा आर्थिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा भूमि अनुदान (Brahmadeya/Agrahara) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे प्रशासनिक और राजकोषीय विशेषाधिकारों से युक्त सामंती प्रवृत्तियों का उदय हुआ। 2. गुप्त काल में 'गुप्तचर विभाग' को 'पुरुष' कहा जाता था और महादण्डनायक नामक अधिकारी मुख्य रूप से न्याय और सैन्य विभाग का उच्च अधिकारी होता था, जबकि 'अधिकरण' नगर स्तर का प्रशासनिक अधिकरण था। 3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में 'दिनार' स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन कुषाणों की स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में शुद्धता और वजन में कहीं अधिक उत्कृष्ट था, जो गुप्त काल के 'स्वर्ण युग' की अद्वितीय आर्थिक समृद्धि को प्रमाणित करता है। 4. गुप्तोत्तर काल के आते-आते विदेशी व्यापार में भारी गिरावट आ गई, विशेष रूप से रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंधों के क्षीण होने के कारण सिक्कों में सोने की मात्रा कम होने लगी और चांदी एवं तांबे के सिक्कों का प्रचलन भी सीमित हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? औरंगजेब के काल में किस क्षेत्र में "अहोम" विद्रोहियों ने मुगलों को कड़ी चुनौती दी थी? सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान और उसके पश्चात आयोजित गोलमेज सम्मेलनों तथा गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते (1931) के तहत सरकार ने हिंसात्मक अपराधों के आरोपियों को छोड़कर शेष सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और समुद्र के किनारे बिना कर दिए नमक बनाने का अधिकार स्वीकार कर लिया था। 2. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद और ब्रिटिश सरकार की अनुदार नीतियों के कारण यह सम्मेलन पूरी तरह असफल रहा। 3. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था और उन्होंने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग की थी, जिसे महात्मा गांधी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था। 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन का कांग्रेस द्वारा पूर्ण बहिष्कार किया गया था, और इसी सम्मेलन के निर्णयों के आधार पर बाद में 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। 2. दानापुर छावनी के 7th, 8th और 40th बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार करके सीधे आरा जा पहुंचे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया। 3. छपरा (सारण) और मुजफ्फरपुर में भी सैनिकों तथा स्थानीय जनता ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध खुला विद्रोह किया, जहाँ छपरा में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में विद्रोही गतिविधियों का संचालन हुआ और सरकारी खजाने पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। 4. आरा (जगदीशपुर) के अमर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर आरा में ब्रिटिश फौज को पराजित किया, किंतु अंग्रेजों द्वारा जगदीशपुर के महल को ध्वस्त किए जाने के बाद बाबू कुंवर सिंह ने कभी भी छापामार युद्ध (Guerrilla warfare) का मार्ग नहीं अपनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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