क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)
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बुरुस फ्रेडरिक स्किनर (B.F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'शेपिंग या आकृतीकरण' (Shaping / Successive Approximation)**—जिसे उस जटिल व्यवहार के निर्माण की मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी वांछित अंतिम जटिल व्यवहार (Target Behavior) को प्राप्त करने के लिए क्रमिक रूप से उसके निकटवर्ती छोटे-छोटे चरणों और सन्निकट अनुक्रियाओं (Successive Approximations) को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके धीरे-धीरे ढाला जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए जटिल कौशलों, अनुशासित आदतों और चरणबद्ध अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
व्याख्या: बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) के क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (Operant Conditioning Theory) में 'शेपिंग' (Shaping) या 'आकृतीकरण' एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसे 'सन्निकट सन्निकटन का सिद्धांत' (Method of Successive Approximations) भी कहा जाता है। जब कोई जटिल व्यवहार (जैसे लिखना सीखना, जटिल गणितीय समीकरण हल करना, या वैज्ञानिक प्रयोग करना) एक बार में नहीं सीखा जा सकता, तब शिक्षक या प्रयोगकर्ता अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ने वाली हर छोटी और क्रमिक प्रगति (Successive Approximation) को सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) प्रदान करता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह विधि विशेष रूप से बच्चों में नए, जटिल और अनुशासित कौशल विकसित करने के लिए अत्यधिक वैज्ञानिक और प्रभावी मानी जाती है। अत: विकल्प (b) इस संकल्पना के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे अधिक प्रामाणिक रूप से व्यक्त करता है।
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