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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality Level) के दूसरे चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून का पालन बाहरी दबाव, दंड के भय या सामाजिक अनुमोदन के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वयं के आंतरिक रूप से विकसित सार्वभौमिक न्याय, मानवाधिकारों और अंतरात्मा के उन उच्च नैतिक सिद्धांतों के आधार पर करता है जो संपूर्ण मानवता के लिए न्यायसंगत और तार्किक रूप से अनिवार्य होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक स्वायत्तता, तार्किक निर्णय लेने की क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) के अंतर्गत 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) सर्वोच्च और अंतिम चरण है। इस अवस्था में व्यक्ति बाहरी कानूनों या सामाजिक दबावों से ऊपर उठकर अपने विवेक, न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों, मानवाधिकारों और समानता के आधार पर निर्णय लेता है। यहाँ नैतिकता बाह्य नियंत्रण से मुक्त होकर पूर्णतः आंतरिक और स्वायत्त हो जाती है। अतः विकल्प (c) इस अवधारणा के मनोवैज्ञानिक निहितार्थों को सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
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