BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
3 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद और प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism and Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति या आंतरिक मानसिक तैयारी के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत यदि कोई तंत्रिकाीय पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतुष्टि और आनंद की प्राप्ति होती है, जबकि बाधा उत्पन्न होने पर कुंठा या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अधिगम प्रेरणा, मानसिक संरेखण और अकादमिक तत्परता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

एडवर्ड थॉर्नडाइक के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) यह स्पष्ट करता है कि अधिगम तभी सबसे प्रभावी और संतोषजनक होता है जब शिक्षार्थी मानसिक, शारीरिक और संवेगात्मक रूप से उस कार्य को सीखने के लिए तैयार होता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इसका वास्तविक निहितार्थ यह है कि शिक्षक को नया विषय पढ़ाने से पूर्व विद्यार्थियों की पूर्व-जानकारी, मानसिक परिपक्वता और जिज्ञासा को जागृत (Pre-requisite readiness) करना चाहिए, ताकि वे सक्रिय रूप से जुड़ सकें।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित 'शाखाबद्ध प्रोग्राम्ड इंस्ट्रक्शन' (Branching Programmed Instruction / Intrinsic Programming) के अंतर्गत आने वाली उस मूल अवधारणा के संबंध में—जिसके तहत शिक्षार्थी के पूर्व-प्रतिक्रिया विकल्पों और निदान के आधार पर उसे विभिन्न शाखाओं या वैकल्पिक उपचारात्मक मार्गों (Remedial Paths) की ओर निर्देशित किया जाता है, ताकि उसकी व्यक्तिगत त्रुटियों का तत्काल समाधान किया जा सके—निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन कक्षा-कक्षीय शिक्षण और व्यक्तिगत विभिन्नताओं के वैज्ञानिक संचालन के दृष्टिकोण से सबसे अधिक प्रामाणिक और मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शaping' (आकृति-निर्माण या क्रमिक सन्निकटन विधि - Shaping) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल, वांछित और नए व्यवहार को प्राप्त करने के लिए प्राणी के क्रमिक और निकटवर्ती approximations (सन्निकटन) कदमों को लगातार सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) प्रदान किया जाता है जब तक कि वह अंतिम और जटिल लक्ष्य व्यवहार को पूरी तरह से प्रदर्शित न करने लगे—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के विशिष्ट कौशलों के विकास, सुधारात्मक शिक्षण और व्यवहार संशोधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning) के चार अंतःसंबंधित घटकों—(1) ध्यान (Attention), (2) धारणा/स्मरण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरणा/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा 'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रतिरूपण (Modeling), स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy), और परोक्ष पुनर्बलन (Vicarious Reinforcement) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Level) की पांचवीं अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून एक सामाजिक अनुबंध (Social Contract) के रूप में लचीले होने चाहिए, जिन्हें समाज के कल्याण और व्यक्तिगत मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक रूप से बदला जा सकता है, न कि वे कठोर या अपरिवर्तनीय अंतिम सत्य होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तार्किकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' (Progressive Education and Experiential Learning) सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन या विचारशील समस्या-समाधान' (Reflective Thinking / Inquiry-based Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी संशयपूर्ण या वास्तविक जीवन की समस्या का सामना करने पर सक्रिय रूप से परिकल्पनाओं का निर्माण करता है, उनका तार्किक और प्रायोगिक परीक्षण करता है, तथा निष्क्रिय स्मरण के स्थान पर 'करके सीखना' (Learning by Doing) के माध्यम से वास्तविक ज्ञान का निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक स्वायत्तता और प्रयोजनवादी ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.