संज्ञानात्मक विकास
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डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मूर्त अनुभव से सक्रिय प्रयोग तक की प्रक्रिया' (Concrete Experience to Active Experimentation)**—जिसे उस चार-चरणीय चक्रीय अधिगम मॉडल के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी पहले किसी नई परिस्थिति का प्रत्यक्ष मूर्त अनुभव (Concrete Experience) प्राप्त करता है, फिर उसका चिंतनशील अवलोकन (Reflective Observation) करता है, उसके बाद अमूर्त अवधारणाओं और सामान्यीकरणों का निर्माण (Abstract Conceptualization) करता है, और अंत में नए ज्ञान का परीक्षण करने के लिए सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के चक्रीय संज्ञान, अनुभवात्मक प्रसंस्करण और प्रायोगिक अनुप्रयोग के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
व्याख्या: डेविड कोल्ब (David Kolb) का 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) इस बात पर जोर देता है कि सीखना एक चक्रीय प्रक्रिया है जिसमें अनुभव, अवलोकन, वैचारिक चिंतन और सक्रिय प्रयोग शामिल होते हैं। विकल्प (A) इस सिद्धांत के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप का सबसे सटीक वर्णन करता है, जो बताता है कि ये चारों चरण आपस में मिलकर विद्यार्थी के संज्ञानात्मक विकास और ज्ञान के निर्माण को सुदृढ़ बनाते हैं। अन्य विकल्प इस सिद्धांत के मूल अर्थ के विपरीत या भ्रामक हैं।
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