संज्ञानात्मक विकास
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रगामी संगठक या एडवांस ऑर्गेनाइजर' (Advance Organizer)**—जिसे उस pedagogical उपकरण या प्रारंभिक शिक्षण सामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे मुख्य और नई विषय-वस्तु को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह उनके संज्ञानात्मक ढांचे में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों (Prior Knowledge) और स्कीमा के साथ नए ज्ञान को जोड़ने के लिए एक वैचारिक सेतु (Conceptual Bridge) का कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक समावेश, अर्थपूर्ण ज्ञान-सर्जन और संज्ञानात्मक संरचना के सुदृढ़ीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
डेविड औसुबेल के अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer) वे प्रारंभिक परिचयात्मक सामग्रियां हैं जिन्हें मुख्य पाठ से पहले उच्च स्तर की व्यापकता और समावेशन के साथ प्रस्तुत किया जाता है। यह विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) और नए ज्ञान के बीच एक 'संज्ञानात्मक सेतु' का काम करता है, जिससे 'सब्संप्शन' (Subsumption - अवकलित स्वांगीकरण) की प्रक्रिया तेज होती है और ज्ञान रटने के बजाय अर्थपूर्ण तथा स्थायी रूप से मस्तिष्क में समाहित हो जाता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of…
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हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्राकृतिक बुद्धि' (Naturalistic Intelligence)**—जिसे उस संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न रूपों, वनस्पतियों, जीवों, पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय पैटर्न की सूक्ष्म पहचान करने, उनका वर्गीकरण करने और प्राकृतिक दुनिया के साथ संवेदनशीलता से जुड़ने में अत्यधिक कुशल होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक अधिगम, पर्यावरण-उन्मुख चिंतन और क्षेत्र-आधारित अन्वेषण (Field-based Exploration) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न-अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)**—जिसे उस मानसिक या आंतरिक प्रतिनिधित्व के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत प्राणी (मनुष्य या पशु) अपने पर्यावरण, परिवेश, रास्तों, और लक्ष्यों के स्थानिक और पर्यावरणीय संबंधों का अपने मस्तिष्क में एक मानसिक नक्शा या खाका तैयार कर लेता है, जिससे वह किसी बाह्य सुदृढीकरण (Reinforcement) के बिना भी परिस्थिति का अन्वेषण और समस्या-समाधान कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक संज्ञान, अंतर्निहित अधिगम (Latent Learning) और मानसिक संरचना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह भली-भांति समझ लेता है कि किसी वस्तु के बाह्य स्वरूप, आकार, रूप-रंग या विन्यास (Appearance) में परिवर्तन होने पर भी उसके मूल भौतिक गुण जैसे—द्रव्यमान, भार, आयतन या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक चिंतन, मूर्त संक्रियात्मक योग्यता और विकेंद्रीकरण (Decentration) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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कोहलबर्ग के अनुसार, सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
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