BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
2 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटगोमेरी मास्टर्स (Norman G. Milgram) अथवा सामान्यतः शैक्षणिक मनोविज्ञान में प्रयुक्त **'मास्टर लर्निंग मॉडल या प्रवीणता अधिगम मॉडल' (Mastery Learning Model)**—जिसे बेंजामिन ब्लूम (Benjamin Bloom) द्वारा अत्यधिक लोकप्रिय बनाया गया—के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'निदानात्मक-उपचारात्मक शिक्षण चक्र या डायग्नोस्टिक-रेमेडियल टीचिंग साइकिल'**—जिसे उस सुव्यवस्थित शैक्षणिक प्रक्रिया के रूप रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक विद्यार्थियों की लघु-स्तरीय फॉर्मेटिव परीक्षाओं (Formative Assessments) के माध्यम से उनके विशिष्ट अधिगम अंतरालों (Learning Gaps) और त्रुटियों का वैज्ञानिक निदान (Diagnosis) करता है और तदुपरांत उन्हें पूरक शिक्षण सामग्रियां, सुधारात्मक रणनीतियाँ (Corrective Strategies) एवं पर्याप्त अतिरिक्त समय प्रदान करके प्रत्येक विद्यार्थी को विषयवस्तु में न्यूनतम 80% से 90% तक की 'प्रवीणता' (Mastery) प्राप्त करने का अवसर देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत भिन्नताओं के समाधान, सुदृढ़ीकरण और अकादमिक सफलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के पाठ्यक्रम के अनुसार, बेंजामिन ब्लूम द्वारा प्रतिपादित 'प्रवीणता अधिगम' (Mastery Learning) और 'निदानात्मक-उपचारात्मक शिक्षण' का मुख्य मनोवैज्ञानिक आधार यह है कि अधिकांश छात्र स्कूल में जो कुछ भी सीख सकते हैं, यदि उन्हें उचित शिक्षण स्थितियां और पर्याप्त समय प्रदान किया जाए तो वे लगभग सभी एक निश्चित स्तर की महारत हासिल कर सकते हैं। यह मॉडल पारंपरिक 'सामान्य वितरण वक्र' (Normal Curve) की धारणा को खारिज करता है और यह मानता है कि अधिगम की असफलताएं विद्यार्थियों की जन्मजात अक्षमता के कारण नहीं, बल्कि अनुचित शिक्षण विधियों और समय की कमी के कारण होती हैं। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा का सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उरी ब्रॉन्फ्रेब्रेनर्स (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकी प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'काल-मंडल' (Chronosystem) की अवधारणा—जिसके तहत पर्यावरणीय प्रणालियों और समय के साथ होने वाले जीवन के बदलावों (जैसे माता-पिता का तलाक, ऐतिहासिक आर्थिक संकट, या कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियां) का किसी बच्चे के संपूर्ण विकास और व्यवहार पर पड़ने वाले ऐतिहासिक एवं लौकिक प्रभावों का अध्ययन किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समय-सापेक्ष अनुभवों, ऐतिहासिक परिवर्तनों और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता या संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'असुरक्षित-प्रतिरोधी / उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment)**—जिसके तहत शिशु अपनी प्राथमिक देखभाल करने वाले (माता-पिता) के प्रति अत्यधिक निकटता और आसक्ति तो प्रदर्शित करता है, परंतु जब देखभाल करने वाला व्यक्ति वापस लौटता है, तो शिशु एक ही समय में उससे चिपकने और अत्यधिक क्रोध या विरोध (Resistance) प्रकट करने की मिश्रित एवं विरोधाभासी प्रतिक्रिया देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), विद्यालयी समायोजन और अनिश्चितता के प्रति सहिष्णुता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, मोंटेसरी पद्धति (Montessori Method) के प्रवर्तक मारिया मोंटेसरी (Maria Montessori) के 'बाल-केंद्रित शिक्षा दर्शन' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'तैयारी का वातावरण या तैयार परिवेश' (Prepared Environment)**—जिसे उस सुव्यवस्थित, सौंदर्यपूर्ण और वैज्ञानिक रूप से संरचित भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक कक्षा-कक्षीय परिवेश के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बच्चे की विकासात्मक आवश्यकताओं, आयु-उपयुक्त संवेदी सामग्रियों और मनोवैज्ञानिक स्वतंत्रता के अनुरूप हर वस्तु इस प्रकार व्यवस्थित होती है कि शिक्षार्थी बिना किसी बाहरी वयस्क हस्तक्षेप के अपनी आंतरिक प्रेरणा, स्व-निर्देशित अन्वेषण और स्वतः-सुधार (Self-correction) की क्षमता के माध्यम से स्वतंत्र रूप से ज्ञान का अर्जन कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की स्वायत्तता, संवेदी-पेशीय विकास (Sensory-motor Development) और सक्रिय स्वतंत्र अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस उन्नत शिक्षाशास्त्रीय संरचना के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी भी कठिन या व्यापक विषय-वस्तु को विद्यार्थी के विकासात्मक स्तर के अनुसार पहले सरल, मूर्त और अंतःक्रियात्मक रूप (Enactive) में, फिर प्रतीकात्मक-चित्रमयी रूप (Iconic) में और अंततः अमूर्त व औपचारिक रूप (Symbolic) में बार-बार उच्चतर स्तरों पर इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि प्रत्येक क्रमिक पुनरावृत्ति के साथ ज्ञान का दायरा और उसकी जटिलता बढ़ती जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थायी ज्ञान-सर्जन, संज्ञानात्मक स्कीमा के क्रमिक विकास और उच्च-स्तरीय तार्किक संरचना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावीकारिता या सेल्फ-एफिकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट स्थिति में अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रेरणा, दृढ़ता और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.