BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
7 views

भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत किसी विदेशी अर्जित भू-भाग (Acquired Territory) को भारत में शामिल करने के लिए भी अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने के लिए कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद में पुनः स्थापित नहीं कर सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका विचार जानने के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होता है।
  3. 3. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से कानून बनाना पर्याप्त है, और इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
  4. 4. 100वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ भू-भागों की अदला-बदली (Land Boundary Agreement) की गई थी, जिसे लागू करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करना आवश्यक था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 2 के तहत भारतीय संघ में नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना की शक्ति संसद को दी गई है, किंतु 'विदेशी भू-भाग को भारत में शामिल करने' (अधिग्रहण) के लिए साधारण विधि या अनुच्छेद 368 के संशोधन की अनिवार्यता पर 'बेरूबारी वाद' और 9वें संविधान संशोधन (1960) के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि विदेशी राज्य को भू-भाग देने के लिए संशोधन चाहिए, जबकि साधारण प्रवेश अनुच्छेद 2 के तहत होता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि भारत के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession) के लिए अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान संशोधन करना अनिवार्य है, केवल साधारण बहुमत से ऐसा नहीं किया जा सकता। कथन 2 और 4 बिल्कुल सही हैं; अनुच्छेद 3 के तहत राष्ट्रपति राज्य विधानमंडल की राय लेते हैं जो बाध्यकारी नहीं होती, और 100वें संविधान संशोधन (2015) द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा समझौते को लागू किया गया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति पूरे देश में एक साथ आपातकाल लागू करने के लिए बाध्य था, वह इसके किसी विशिष्ट भाग तक इसे सीमित नहीं कर सकता था। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा (Written Recommendation) प्राप्त होने के बाद ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है। 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा ही यह संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है, तथा अनुच्छेद 359 के तहत अन्य मूल अधिकारों के निलंबन के आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रधानमंत्री की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में है? भारतीय संविधान के 'भाग IX' तथा 'अनुच्छेद 243-I' के अंतर्गत राज्य के 'वित्त आयोग' (Finance Commission) के गठन और उसके कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति की पुनरावलोकन के लिए एक वित्त आयोग का गठन किया जाता है, और यह आयोग अपनी संस्तुतियाँ सीधे केंद्र सरकार को प्रेषित करता है। 2. राज्य का वित्त आयोग पंचायतों के साथ-साथ नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को दिए जाने वाले करों, शुल्कों और टोल के आवंटन के संबंध में राज्यपाल को संस्तुतियाँ देता है। 3. राज्य का वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसके गठन, सदस्यों की योग्यताओं और उनके चयन के तरीके से संबंधित विस्तृत प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 243-I में ही पूर्णतः स्पष्ट रूप से दिए गए हैं, और राज्य विधानमंडल को इस संबंध में कानून बनाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की परिभाषा में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के साथ-साथ अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते उनका बल विधि जैसा हो। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोकक बंधु वाद' या 'केशवानंद भारती वाद' जैसे ऐतिहासिक मामलों में यह प्रतिपादित किया है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संवैधानिक संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' की परिभाषा के दायरे में आता है, जिसके कारण संसद किसी भी मूल अधिकार को संविधान संशोधन के माध्यम से समाप्त या सीमित नहीं कर सकती है। 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, खुफिया संगठनों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कर्मियों के मूल अधिकारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से विधि द्वारा निर्बंधन या प्रतिबंध लगा सकती है, और ऐसे कानूनों को केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वे भाग III का उल्लंघन करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, भले ही वह नागरिकता उसने किसी ऐसी परिस्थिति में अर्जित की हो जो युद्ध काल के दौरान उत्पन्न हुई हो। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारत में 'देशीकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक कम से कम पिछले 14 वर्षों से भारत में निवास कर रहा हो या केंद्र सरकार की सेवा में रहा हो, तथा आवेदन से ठीक पहले के 12 महीनों की निरंतर अवधि भी भारत में बिताई हो। 3. भारतीय संसद को संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकती है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने आज तक नागरिकता अधिनियम, 1955 में कई बार संशोधन किए हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.