BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 21 times

भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या अनुच्छेद 137 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा लोक महत्व के किसी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांगे जाने पर, न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य है, तथा राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए भी पूर्णतः बाध्य होता है।
  3. 3. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद से केवल संसद के प्रत्येक सदन द्वारा कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित समावेदन के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा हटाया जा सकता है।
  4. 4. संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित किया गया विधि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, किंतु स्वयं उच्चतम न्यायालय अपने पूर्ववर्ती निर्णयों (Precedents) से बंधा नहीं होता है और 'न्यायिक पुनरावलोकन' या वृहत् पीठ के माध्यम से अपने पुराने निर्णयों को बदल सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा दिए गए निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 के तहत यदि राष्ट्रपति लोक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांगता है, तो न्यायालय अपनी राय दे सकता है (सलाहकारी क्षेत्राधिकार), किंतु राष्ट्रपति उस परामर्श को मानने के लिए बाध्य नहीं है (और न ही न्यायालय द्वारा दी गई राय सभी मामलों में राष्ट्रपति को देना अनिवार्य है, विशेषकर पूर्व-संविधान संधियों के मामलों में यह विवेकाधीन है)। कथन 3 सही है, न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया अनुच्छेद 124(4) और न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968 के तहत संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत) से पारित प्रस्ताव और राष्ट्रपति के आदेश पर होती है। कथन 4 सही है, अनुच्छेद 141 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का निर्णय देश के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट खुद अपने पुराने निर्णयों से पूर्णतः आबद्ध नहीं है और वह वृहत् पीठ (Larger Bench) गठित करके अपने पूर्व निर्णयों को पलट सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों तथा राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के… ← पिछला प्रश्न भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और…

Related Questions

→ भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उसकी समितियों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है। 2. महान्यायवादी को उसके पद से हटाने के लिए संविधान में किसी महाभियोग जैसी विशेष प्रक्रिया या आधार का उल्लेख नहीं किया गया है, और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) अपने पद पर धारण करता है। 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा अपने पद से सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र के पश्चात सीएजी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या लाभ के पद को धारण करने के लिए पूर्णतः अपात्र होता है। 4. CAG द्वारा संघ के लेखाओं से संबंधित तैयार की गई लेखापरीक्षा रिपोर्ट सीधे संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की जाती है, और इसके लिए उसे राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति या माध्यम की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत किसी विदेशी अर्जित भू-भाग (Acquired Territory) को भारत में शामिल करने के लिए भी अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने के लिए कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद में पुनः स्थापित नहीं कर सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका विचार जानने के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होता है। 3. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से कानून बनाना पर्याप्त है, और इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। 4. 100वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ भू-भागों की अदला-बदली (Land Boundary Agreement) की गई थी, जिसे लागू करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करना आवश्यक था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण' प्रदान किया गया है, जिसके दायरे में सर्वोच्च न्यायालय ने 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ वाद (2017) में नौ जजों की संविधान पीठ के सर्वसम्मत निर्णय द्वारा एक मौलिक अधिकार घोषित किया था। 2. अनुच्छेद 20(2) में वर्णित 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के सिद्धांत के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता है, और यह संवैधानिक संरक्षण विभागीय या प्रशासनिक (Departmental) कार्यवाहियों के साथ-साथ न्यायिक न्यायालयों दोनों पर समान रूप से लागू होता है। 3. अनुच्छेद 21A के माध्यम से 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया गया, जिसे प्रभावी बनाने के लिए संसद ने 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act) पारित किया था। 4. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय जाने के अधिकार को डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा गया है, और यह स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसे राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी किसी भी परिस्थिति में निलंबित या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार पाकिस्तान से भारत को प्र्रव्रजित करने वाले व्यक्तियों को नागरिकता के अधिकार प्राप्त होने की शर्त यह है कि प्र्रव्रजन 19 जुलाई 1948 से पहले हुआ हो और उसके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई भी अविभाजित भारत में पैदा हुआ हो, तथा यदि प्र्रव्रजन 19 जुलाई 1948 को या उसके पश्चात हुआ है, तो उसे भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष पंजीकरण कराना अनिवार्य था और इसके लिए पंजीकरण से ठीक पहले कम से कम छह महीने तक भारत में निवास करना आवश्यक था। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से रोक दिया जाता है या प्रतिबंध लगाया जाता है, तथा आवेदन से ठीक पहले के 12 महीनों की निरंतर अवधि के दौरान भी भारत में निवास करता रहा हो। 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के माध्यम से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा, और उनके लिए देशीयकरण या पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने हेतु भारत में निवास की आवश्यक अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। 4. संविधान का अनुच्छेद 10 यह स्पष्ट करता है कि संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए भारत का प्रत्येक नागरिक भाग II के उपबंधों के तहत नागरिक बना रहेगा, किंतु संसद को यह अधिकार नहीं है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या संप्रभुता के आधार पर भी किसी नागरिक की नागरिकता को समाप्त करने के लिए कोई नया कानून बना सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.