Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 22 times
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार पाकिस्तान से भारत को प्र्रव्रजित करने वाले व्यक्तियों को नागरिकता के अधिकार प्राप्त होने की शर्त यह है कि प्र्रव्रजन 19 जुलाई 1948 से पहले हुआ हो और उसके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई भी अविभाजित भारत में पैदा हुआ हो, तथा यदि प्र्रव्रजन 19 जुलाई 1948 को या उसके पश्चात हुआ है, तो उसे भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष पंजीकरण कराना अनिवार्य था और इसके लिए पंजीकरण से ठीक पहले कम से कम छह महीने तक भारत में निवास करना आवश्यक था।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से रोक दिया जाता है या प्रतिबंध लगाया जाता है, तथा आवेदन से ठीक पहले के 12 महीनों की निरंतर अवधि के दौरान भी भारत में निवास करता रहा हो।
- 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के माध्यम से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा, और उनके लिए देशीयकरण या पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने हेतु भारत में निवास की आवश्यक अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
- 4. संविधान का अनुच्छेद 10 यह स्पष्ट करता है कि संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए भारत का प्रत्येक नागरिक भाग II के उपबंधों के तहत नागरिक बना रहेगा, किंतु संसद को यह अधिकार नहीं है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या संप्रभुता के आधार पर भी किसी नागरिक की नागरिकता को समाप्त करने के लिए कोई नया कानून बना सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत पाकिस्तान से भारत प्र्रव्रजित करने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के नियम दिए गए हैं। यदि प्र्रव्रजन 19 जुलाई 1948 से पहले हुआ है और माता-पिता/दादा-दादी में से कोई अविभाजित भारत में जन्मा था, तो वह स्वतः नागरिक बन जाता है; 19 जुलाई 1948 को या उसके बाद आने वालों को 6 महीने निवास के बाद पंजीकृत होना पड़ता था।
कथन 2 सही है: देशीयकरण द्वारा नागरिकता के लिए आवेदक को अच्छे चरित्र, संविधान की निष्ठा, भारतीय भाषा के ज्ञान के साथ-साथ यह शर्त पूरी करनी होती है कि वह ऐसे देश से न हो जहाँ भारतीयों पर प्रतिबंध हो और आवेदन से पूर्व 12 माह निरंतर भारत में रहा हो।
कथन 3 सही है: नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 उपर्युक्त छह अल्पसंख्यक समुदायों के अवैध प्रवासियों को छूट देता है और उनके लिए प्राकृतिक रूप से निवास की अवधि 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करता है।
कथन 4 गलत है: अनुच्छेद 10 यह उपबंध करता है कि संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन रहते हुए नागरिक बने रहेंगे, किंतु संसद को यह पूर्ण अधिकार है कि वह विधि बनाकर नागरिकता की समाप्ति (विच्छेदन, वंचन आदि) के प्रावधान कर सके। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
कथन 2 सही है: देशीयकरण द्वारा नागरिकता के लिए आवेदक को अच्छे चरित्र, संविधान की निष्ठा, भारतीय भाषा के ज्ञान के साथ-साथ यह शर्त पूरी करनी होती है कि वह ऐसे देश से न हो जहाँ भारतीयों पर प्रतिबंध हो और आवेदन से पूर्व 12 माह निरंतर भारत में रहा हो।
कथन 3 सही है: नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 उपर्युक्त छह अल्पसंख्यक समुदायों के अवैध प्रवासियों को छूट देता है और उनके लिए प्राकृतिक रूप से निवास की अवधि 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करता है।
कथन 4 गलत है: अनुच्छेद 10 यह उपबंध करता है कि संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन रहते हुए नागरिक बने रहेंगे, किंतु संसद को यह पूर्ण अधिकार है कि वह विधि बनाकर नागरिकता की समाप्ति (विच्छेदन, वंचन आदि) के प्रावधान कर सके। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
अगला प्रश्न →
भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक…
Related Questions
→
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया तथा उसके सेवा शर्तें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता है।
2. 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023' के प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन आयोग के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत किसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटों की अवधि के दौरान किसी भी जनसभा, जुलूस या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार करने पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
4. निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई 'cVIGIL' ऐप का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों द्वारा आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के उल्लंघन और चुनावी कदाचार की घटनाओं की लाइव डिजिटल तस्वीरें या वीडियो आधारित शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, क्षेत्राधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या अनुच्छेद 137 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है।
2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा लोक महत्व के किसी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांगे जाने पर, न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य है, तथा राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए भी पूर्णतः बाध्य होता है।
3. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद से केवल संसद के प्रत्येक सदन द्वारा कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित समावेदन के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा हटाया जा सकता है।
4. संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित किया गया विधि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, किंतु स्वयं उच्चतम न्यायालय अपने पूर्ववर्ती निर्णयों (Precedents) से बंधा नहीं होता है और 'न्यायिक पुनरावलोकन' या वृहत् पीठ के माध्यम से अपने पुराने निर्णयों को बदल सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन तथा संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्त्वाटों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, तथा इन्हें देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी भी परिस्थिति में प्रवर्तित (Enforced) कराया जा सकता है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए निदेशक तत्व जोड़े गए, जिनमें अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता), अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी), तथा अनुच्छेद 48A (पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा) प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं।
3. 'मिनर्वा मिल्स लिमिटेड बनाम भारत संघ वाद (1980)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन पर आधारित है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर अनन्य प्राथमिकता देना संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को नष्ट कर सकता है।
4. संविधान का अनुच्छेद 45, जो मूल रूप से चौदह वर्ष की आयु पूरी करने तक सभी बालकों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के राज्य के प्रयास से संबंधित था, को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित किया गया और प्रारंभिक बाल्यावस्था की देखरेख तथा शिक्षा से संबंधित बनाया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंध किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा निरस्त कर दिया गया।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल को संपूर्ण देश या उसके किसी विशिष्ट भाग पर एक साथ लागू करने की व्यवस्था की गई, तथा आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का स्वतः निलंबन केवल 'युद्ध' और 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर ही संभव बनाया गया, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर नहीं।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त किसी भी मूल अधिकार के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन के पश्चात अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को निलंबित करने की शक्ति किसी भी परिस्थिति में नहीं दी जा सकती है।
4. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल तक तब तक प्रवृत्त रहता है जब तक कि राष्ट्रपति द्वारा इसे वापस (Revoke) नहीं ले लिया जाता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.