BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
6 views

भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इस शक्ति के अंतर्गत भारतीय संघ में किसी विदेशी भू-भाग को शामिल करने के लिए संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस प्रकार का कोई भी अध्यादेश या विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका मत जानने के लिए भेजता है, जो राष्ट्रपति या संसद पर बाध्यकारी होता है।
  3. 3. 'बेरूबारी संघ मामला (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद द्वारा साधारण बहुमत से साधारण विधि पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है।
  4. 4. संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, सीमा परिवर्तन आदि से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया द्वारा ही पारित की जा सकती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 2 के तहत भारतीय संघ में नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना के लिए संसद साधारण बहुमत से कानून बना सकती है; इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती, बशर्ते मामला किसी विदेशी भू-भाग को भारत में मिलाने का हो (साधारण विधि पर्याप्त है)। कथन 2 असत्य है क्योंकि संबंधित राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी (Binding) नहीं होता है, संसद उस मत को मानने के लिए स्वतंत्र है। कथन 3 सत्य है, 'बेरूबारी संघ वाद (1960)' में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि भारत का कोई क्षेत्र किसी अन्य देश को देने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन आवश्यक है (हालांकि 9वां संविधान संशोधन 1960 इसी हेतु किया गया था)। कथन 4 सत्य है, अनुच्छेद 4 स्वयं यह प्रावधान करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के अंतर्गत बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 368 के अर्थ के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाएगा। इस विषय के संपूर्ण अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार लोकसभा में लंबित कोई विधेयक, जो लोकसभा के विघटन के कारण व्यपगत (Lapse) हो जाता है, राज्यसभा में लंबित ऐसा विधेयक व्यपगत नहीं होता जिसे लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया हो, किंतु यदि कोई विधेयक राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा द्वारा उसे पारित किए जाने के बाद लोकसभा विघटित हो जाती है, तो वह विधेयक व्यपगत हो जाता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधियों और वित्तीय विधेयकों (धन विधेयक को छोड़कर) के मामलों में गतिरोध को दूर करने के लिए है, तथा संविधान संशोधन विधेयकों के संदर्भ में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। 3. राज्यसभा को लोकसभा की तुलना में यह विशेष संवैधानिक विशेषाधिकार प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित कर सकती है, जिसके आधार पर संसद कानून बना सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और संघीय मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व एवं कामकाज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए बनने वाले निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य ही शामिल होते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं और विधानपरिषदों के सदस्यों को इसमें भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा कोई भी ऐसा व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त होने के पश्चात् अधिकतम छह महीने की अवधि के भीतर संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनने की अनिवार्यता पूरी करता है। 3. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पर आधारित है, और इसे संविधान के लागू होने के पश्चात केवल एक बार (42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा) संशोधित किया गया है जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए। 2. 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है, तथा संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन करते हुए इसके किसी भी मूल भाग को हटा सकती है। 3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' और 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद (1995)' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न अंग है, और यद्यपि यह देश की विधायिका को कोई नई शक्ति प्रदान नहीं करती और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथापि यह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों तथा आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकती है, और इसके साथ ही अनुच्छेद 358 व 359 के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को भी राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जा सकता है। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित निर्णय के बिना नहीं की जा सकती है। 3. 44वें संविधान संशोधन के द्वारा ही यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार केवल तभी स्वतः निलंबित होंगे जब आपातकाल का आधार 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' हो, न कि 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की संरचना, निर्वाचन पद्धति तथा धन विधेयकों से संबंधित विशेष शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु यह भी अनिवार्य किया गया है कि किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या चालीस से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के समय इसकी संख्या भिन्न थी)। 2. विधान परिषद के निर्वाचन में कुल संरचना का एक-तिहाई हिस्सा स्थानीय निकायों (जैसे नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों) के निर्वाचकों द्वारा, एक-बारहवां हिस्सा उन स्नातकों द्वारा जो उस राज्य के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष से निवास कर रहे हों, और एक-तिहाई हिस्सा सीधे राज्य की विधानसभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किया जाता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) को विधान परिषद में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई धन विधेयक विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास यह शक्ति होती है कि वह उस विधेयक को अधिकतम चौदह दिनों की अवधि तक रोक सके या अपनी संस्तुति के साथ वापस भेज सके, किंतु यदि विधान परिषद निर्धारित चौदह दिनों के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे विधानसभा ने पारित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.