BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
10 views

भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार लोकसभा में लंबित कोई विधेयक, जो लोकसभा के विघटन के कारण व्यपगत (Lapse) हो जाता है, राज्यसभा में लंबित ऐसा विधेयक व्यपगत नहीं होता जिसे लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया हो, किंतु यदि कोई विधेयक राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा द्वारा उसे पारित किए जाने के बाद लोकसभा विघटित हो जाती है, तो वह विधेयक व्यपगत हो जाता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधियों और वित्तीय विधेयकों (धन विधेयक को छोड़कर) के मामलों में गतिरोध को दूर करने के लिए है, तथा संविधान संशोधन विधेयकों के संदर्भ में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
  3. 3. राज्यसभा को लोकसभा की तुलना में यह विशेष संवैधानिक विशेषाधिकार प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित कर सकती है, जिसके आधार पर संसद कानून बना सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 107 के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई विधेयक राज्यसभा में लंबित है और उसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है (चाहे वह राज्यसभा में ही उत्पन्न हुआ हो या लोकसभा द्वारा प्रेषित किया गया हो), तो लोकसभा के विघटन होने पर वह विधेयक व्यपगत (Lapse) **नहीं** होता है। इसके विपरीत, यदि कोई विधेयक लोकसभा में लंबित है या लोकसभा द्वारा पारित होकर राज्यसभा में लंबित है, तो लोकसभा के विघटन पर वह व्यपगत हो जाता है। कथन 2 बिल्कुल सही है; संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों के लिए बुलाई जा सकती है, धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। कथन 3 भी बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 312 के तहत नई अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन करने की अनन्य शक्ति राज्यसभा को प्राप्त है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Share:

Related Questions

एक्जोवायोलॉजी (Exobiology) क्या है? संविधान का भाग 3 किससे संबंधित है? 86वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया मौलिक कर्तव्य किससे संबंधित है? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित अनुशंसा पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को केवल तभी निलंबित किया जा सकता है जब आपातकाल की उद्घोषणा युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर की गई हो, न कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर। 3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को अनुच्छेद 359 के तहत यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रारूप समिति के अध्यक्ष?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.