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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की अधिकारिता, अवमानना की शक्ति तथा अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 215 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है और उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना से संबंधित मामलों में दंडित करने की अनन्य शक्ति भी सम्मिलित है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही नहीं, बल्कि किसी अन्य विधिक अधिकार के प्रवर्तन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) केवल उस राज्य के प्रादेशिक सीमा तक ही सीमित है जिसके अंतर्गत वह उच्च न्यायालय स्थापित है, भले ही वह कारण (Cause of Action) उस राज्य की सीमा से बाहर उत्पन्न हुआ हो।
  3. 3. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 233 के अंतर्गत आते हैं, जिसके अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए किसी व्यक्ति की संस्तुति संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा की जानी अनिवार्य है, और ऐसा व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो तथा संघ या राज्य की सेवा में पहले से अधिकारी न हो।
  4. 4. संविधान के अनुच्छेद 235 के अनुसार राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी का अनुदान शामिल है, संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत को सुनिश्चित करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 215 के तहत उच्च न्यायालय को अपनी और अपने अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है, किंतु केवल अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए सजा देने की 'अनन्य शक्ति' उच्च न्यायालय के पास नहीं है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय और अन्य विधिक प्रावधान भी इसमें भूमिका निभाते हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि 15वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 द्वारा अनुच्छेद 226 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया था कि उच्च न्यायालय अपनी रिट अधिकारिता का प्रयोग उस राज्य के बाहर भी कर सकता है यदि वह 'कॉज ऑफ एक्शन' (Cause of Action) पूर्णतः या आंशिक रूप से उसके प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर उत्पन्न हुआ हो। कथन 3 पूर्णतः सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है और वह व्यक्ति सात वर्ष तक अधिवक्ता होना चाहिए तथा संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में नहीं होना चाहिए। कथन 4 पूर्णतः सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 235 के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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