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Indian Polity
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भारत का प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन था?

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हरिलाल जे. कनिया प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी भाग लेते हैं। 2. उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्यसभा द्वारा अपने तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित एक संकल्प द्वारा जिसे लोकसभा सहमत हो, हटाया जा सकता है, किंतु इस प्रकार का संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे प्रस्तुत करने के कम से कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना न दी गई हो। 3. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत में चुनावी वित्तपोषण (Electoral Funding) और राजनीतिक दलों के नियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी राजनीतिक दल किसी व्यक्ति या किसी कंपनी से 20,000 रुपये से अधिक का नकद चंदा प्राप्त नहीं कर सकता है, और यदि कोई दल इस सीमा से अधिक का योगदान प्राप्त करता है, तो उसे आयकर अधिनियम के तहत कर छूट (Tax Exemption) का लाभ नहीं मिलेगा। 2. चुनावी बॉण्ड योजना (Electoral Bonds Scheme), जिसे वर्ष 2018 में अधिसूचित किया गया था, के अंतर्गत कोई भी भारतीय नागरिक या भारत में निगमित संस्था स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की चुनिंदा शाखाओं से बॉण्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदा दे सकती थी, तथा इस योजना की यह विशेषता थी कि इसमें दाता (Donor) की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती थी और राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले का नाम चुनाव आयोग को बताना अनिवार्य नहीं था। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने ऐतिहासिक निर्णय (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत संघ वाद, 2024) में चुनावी बॉण्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह योजना सूचना के अधिकार (आरटीआई) और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रदत्त वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और वह इस रूप में अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा, किंतु जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्यसभा के सभापति के रूप में किसी भी वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा, बल्कि उसे राष्ट्रपति के वेतन और परिलब्धियों प्राप्त करने का अधिकार होगा। 2. अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति को उसके कृत्यों के प्रयोग में सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग इस सलाह के अनुसार करने के लिए पूरी तरह बाध्य है, तथा मंत्रिपरिषद द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह की किसी भी न्यायालय में जाँच की जा सकती है। 3. अनुच्छेद 75(2) के उपबंधों के अनुसार प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से कभी भी और किसी भी कारण से बर्खास्त कर सकता है, भले ही लोकसभा में प्रधानमंत्री के पास स्पष्ट बहुमत क्यों न हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण, मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों या सीमाओं में परिवर्तन तथा उनके नामों में परिवर्तन करने की संसद की अनन्य शक्ति का प्रावधान किया गया है। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या उसके क्षेत्र में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक उस राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार भेजने की आवश्यकता होती है, और राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया कोई भी विचार संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में यह अभिनिर्धारित किया था कि भारतीय क्षेत्र के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से विधि बनाने की शक्ति पर्याप्त है, और इसके लिए किसी संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में संसद को नागरिकता के अधिकार का नियमन करने के लिए कोई अलग से विधि बनाने की आवश्यकता नहीं है। 2. 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, प्राकृतिक रूप से नागरिकता (Naturalisation) प्राप्त करने के लिए आवेदक को भारत सरकार द्वारा निर्धारित किसी एक भाषा का ज्ञान होना आवश्यक नहीं है, बल्कि उसे संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित 22 भाषाओं में से किसी एक भाषा में पूर्ण दक्षता होनी चाहिए। 3. संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, और संसद द्वारा पारित इसी शक्ति के तहत नागरिकता अधिनियम, 1955 में अब तक कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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