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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों (Money Bills) और वित्तीय प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं, और जब विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित कर विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद के पास यह शक्ति होती है कि वह उस विधेयक को अधिकतम 30 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है अथवा उसमें आवश्यक संशोधन करने के लिए अपनी सिफारिशों सहित विधानसभा को वापस भेज सकती है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 202 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में राज्य के उस वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण (वार्षिक वित्तीय विवरण या बजट) राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखवाया जाता है, तथा राज्य की संचित निधि से व्यय होने वाले भारित व्यय (Charged Expenditure) को राज्य विधानसभा में मतदान के लिए रखा जाता है, जबकि अन्य व्यय अनुमानों को केवल सदन में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
  3. 3. राज्य विधानमंडल द्वारा किसी कर को आरोपित करने, समाप्त करने, छूट देने, विनियमित करने या राज्य की संचित निधि से धन निकालने से संबंधित कोई भी वित्तीय विधेयक या कर-प्रस्तावित विधेयक राज्यपाल की पूर्व संस्तुति के बिना विधानसभा में पुरःस्थापित नहीं किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और विधान परिषद के पास इसे रोकने की अधिकतम अवधि केवल **14 दिन** है, 30 दिन नहीं। इसके अलावा, विधान परिषद को धन विधेयक में संशोधन करने या अस्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है; वह केवल अपनी सिफारिशें दे सकती है जिन्हें मानना या न मानना विधानसभा पर निर्भर करता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि राज्य की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) पर राज्य विधानसभा में **मतदान नहीं कराया जा सकता** (यद्यपि इस पर बहस हो सकती है), जबकि अन्य व्यय अनुमानों के लिए अनुदान की मांगें विधानसभा में मतदान के लिए रखी जाती हैं। कथन 3 सत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 207 के अनुसार वित्तीय विधेयक और करों से संबंधित प्रस्ताव राज्यपाल की पूर्व संस्तुति के बिना विधानसभा में पुरःस्थापित नहीं किए जा सकते हैं। अधिक अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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राष्ट्रपति शासन (President\s Rule) से संबंधित प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' और 'विधान परिषद' की वित्तीय शक्तियों, धन विधेयकों (Money Bills) तथा विशेषाधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक राज्य की विधान परिषद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है, और जब विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 30 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है। 2. यदि राज्य की विधान परिषद किसी धन विधेयक को निर्धारित 14 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस नहीं करती है, या उस पर अपनी कोई सहमति नहीं देती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित हुआ माना जाएगा जैसा कि उसे विधानसभा ने पारित किया था। 3. संविधान के अनुच्छेद 197 के प्रावधानों के तहत, धन विधेयक को छोड़कर अन्य किसी भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) के संबंध में यदि विधानसभा और विधान परिषद के बीच गतिरोध उत्पन्न होता है, तो संसद की भाँति राज्य विधानमंडल के लिए भी संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act of 1773) और पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act of 1784) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इस एक्ट के तहत ही कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई थी जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई। 3. रेगुलेटिंग एक्ट के अंतर्गत बंगाल के गवर्नर-जनरल को बंबई और मद्रास की प्रेसिडेंसी को भी अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार मिल गया था, जिससे भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव पड़ी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों तथा राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि वह राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो वह राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा कर सकता है, तथा इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है। 2. 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ' (1994) वाद में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है और अदालतें इस बात की जांच नहीं कर सकती हैं कि राष्ट्रपति की संतुष्टि किस आधार पर आधारित थी। 3. अनुच्छेद 356 के तहत जारी राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि तीन वर्ष तक हो सकती है, किंतु एक वर्ष से आगे इसे बढ़ाने के लिए प्रत्येक छह महीने पर संसद की स्वीकृति की आवश्यकता होती है, और इसके साथ ही यह अनिवार्य शर्त है कि उस समय पूरे देश में या संबंधित राज्य के पूरे हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लागू होना चाहिए या चुनाव आयोग द्वारा यह प्रमाणित किया जाना चाहिए कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना तुरंत संभव नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भोपाल गैस त्रासदी किस वर्ष हुई थी?
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