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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' और 'विधान परिषद' की शक्तियों, विधायी प्रक्रियाओं और विशेषाधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अस्वीकार कर देती है या ऐसे संशोधन करती है जिससे विधानसभा असहमत है, या विधान परिषद द्वारा विधेयक प्राप्ति के पश्चात चार महीने तक कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित करके विधान परिषद को पुनः भेज सकती है, जिसके पश्चात विधान परिषद अधिकतम एक महीने की अवधि तक ही उस विधेयक को रोक सकती है।
  2. 2. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में विधान परिषद की स्थिति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है, और यदि विधान परिषद 14 दिनों के भीतर विधेयक नहीं लौटाती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जैसा विधानसभा ने पारित किया था।
  3. 3. राज्य विधानमंडल के सदनों की अवधि के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 172 के अनुसार, विधानसभा एक निरंतर चलने वाला निकाय है और इसका विघटन कभी नहीं होता है, जबकि विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष के लिए चुना जाता है और इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद की कुल विलंबकारी शक्ति (Delays power) अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और पुनर्विचार के पश्चात 1 महीने) की होती है, न कि प्रथम चरण में चार महीने। इसके अलावा, कथन 3 असत्य है क्योंकि 'विधानसभा' (Legislative Assembly) एक स्थायी निकाय नहीं है, बल्कि इसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है और इसे राज्यपाल द्वारा समय से पहले भी विघटित किया जा सकता है; जबकि 'विधान परिषद' (Legislative Council) एक स्थायी निकाय है जिसका विघटन कभी नहीं होता है (इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष पर सेवानिवृत्त होते हैं)। कथन 2 बिल्कुल सही है; धन विधेयक केवल विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है और विधान परिषद इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही संशोधन कर सकती है, उसे केवल 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के विधानसभा को लौटाना होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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