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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 12-35) और उनसे संबंधित न्यायिक निर्णयों एवं अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल के अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा को भी शामिल किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' नहीं माना जा सकता।
  2. 2. अनुच्छेद 31A के अंतर्गत जमींदारी उन्मूलन और कृषि सुधारों से संबंधित कानूनों को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से संरक्षित करने के लिए नौवीं अनुसूची का प्रावधान मूल संविधान में ही किया गया था, जिसे प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, तथा इस अनुसूची में शामिल किए गए प्रत्येक कानून को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्णतः बाहर रखा गया है।
  3. 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित या निराकृत कर सके ताकि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन और अनुशासन बना रहे, तथा इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने के लिए केवल संसद को ही कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, किसी राज्य के विधानमंडल को नहीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत विधियों की परिभाषा में अध्यादेश, उप-विधि, नियम, विनियम और रूढ़ि या प्रथा आदि आते हैं। केशवानंद भारती वाद (1973) और अन्य ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संविधान संशोधन अधिनियम 'विधि' नहीं है, बशर्ते वह मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन न करे। कथन 2 गलत है क्योंकि नौवीं अनुसूची को मूल संविधान में नहीं बल्कि प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, किंतु सर्वोच्च न्यायालय के 'आई.आर. कोएल्हो वाद (2007)' के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार 24 अप्रैल 1973 के पश्चात नौवीं अनुसूची में शामिल किए गए सभी कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे मूल अधिकारों या संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों और पुलिस बलों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने की शक्ति केवल संसद के पास है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं। विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, उनके विधाई अधिकारों तथा प्रक्रियात्मक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा ने कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा इस आशय का संकल्प पारित कर दिया हो। 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं हो सकती है, सिवाय उस अपवाद के जहाँ संसद विधि द्वारा कोई विशेष उपबंध करे। 3. विधान परिषद के पास साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने (विधानसभा द्वारा पहली बार भेजने पर 3 महीने और विधान परिषद द्वारा रोके जाने के पश्चात विधानसभा द्वारा पुनः पारित कर भेजे जाने पर 1 महीने का अतिरिक्त समय) तक रोकने या विलंब करने की शक्ति होती है, और दोनों सदनों में गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल के अधिनियम का होता है, किंतु इसके लिए यह आवश्यक है कि उसे राज्य के मंत्रिमंडल या मुख्यमंत्री की सलाह पर ही जारी किया जाए, और यदि ऐसा अध्यादेश ऐसे विषयों से संबंधित है जिन्हें राज्य विधानमंडल में पुनः स्थापित करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति की आवश्यकता होती, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना प्रख्यापित नहीं कर सकता है। 2. अनुच्छेद 164(1) के अनुसार राज्यों के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए एक पृथक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए मूल संविधान में ही विशेष उपबंध था जिसे बाद में 91वें संविधान संशोधन द्वारा बदला गया। 3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और मंत्रिपरिषद के निर्णयों के सभी प्रस्ताव राज्यपाल को संसूचित करे, तथा यदि राज्यपाल ऐसा निर्देश दे, तो मंत्रिपरिषद के समक्ष किसी ऐसे विषय को विचार के लिए रखे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने उस पर सामूहिक रूप से विचार नहीं किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत शामिल 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उनके प्रावधानों तथा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-क के अनुच्छेद 51-क के तहत जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में इसमें कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वाँ कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था। 2. स्वर्ण सिंह समिति ने मूल रूप से संविधान में 8 मूल कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की थी और साथ ही यह भी संस्तुति की थी कि संसद को किसी भी मूल कर्तव्य के उल्लंघन या अवहेलना पर दंड या शास्ति (Penalty / Fine) आरोपित करने के लिए विधि बनाने का अधिकार होना चाहिए, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए संविधान में एक नया दंडात्मक उपबंध भी जोड़ा था। 3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, अर्थात् इनके उल्लंघन या पालन न किए जाने पर किसी भी न्यायालय द्वारा इन्हें सीधे प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है, और ये कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, भारत में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद के गठन तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाएगी, किंतु यह संवैधानिक रूप से आवश्यक नहीं है कि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पूर्व लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करे, राष्ट्रपति उसे बहुमत सिद्ध करने के लिए एक उचित समय दे सकते हैं। 2. 'कैबिनेट' (Cabinet) शब्द का मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में कोई उल्लेख नहीं था, और इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में अंतःस्थापित किया गया था ताकि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति को अनिवार्य बनाया जा सके। 3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के अंतर्गत यदि लोकसभा द्वारा प्रधानमंत्री या संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यदि किसी एकल मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो केवल उस संबंधित मंत्री को ही त्यागपत्र देना होता है, पूरी सरकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया तथा उसके सेवा शर्तें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता है। 2. 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023' के प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन आयोग के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत किसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटों की अवधि के दौरान किसी भी जनसभा, जुलूस या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार करने पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। 4. निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई 'cVIGIL' ऐप का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों द्वारा आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के उल्लंघन और चुनावी कदाचार की घटनाओं की लाइव डिजिटल तस्वीरें या वीडियो आधारित शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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