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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों और उनके प्रवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार भौगोलिक सीमाओं और 'किसी अन्य प्रयोजन' के मामले में उच्चतम न्यायालय के रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक व्यापक है।
- 2. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, गुप्तचर संगठनों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कार्मिकों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सके या उन्हें समाप्त कर सके, ताकि उनके द्वारा कर्तव्यों का उचित पालन और अनुशासन बना रहे, तथा यह शक्ति केवल संसद को प्राप्त है, राज्य विधानमंडलों को नहीं।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर घोषित आपातकाल में ही अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित होगा, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर घोषित आपातकाल में नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' (अर्थात सामान्य कानूनी अधिकारों) के लिए भी रिट जारी कर सकता है। इस प्रकार उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार अधिक व्यापक है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 33 के अनुसार सशस्त्र बलों आदि के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने या निर्बंधित करने की शक्ति विशेष रूप से केवल 'संसद' के पास है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं। कथन 3 सही है: 44वें संविधान संशोधन, 1978 के बाद यह प्रावधान किया गया कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर घोषित आपातकाल में अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित नहीं होगा, यह केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित आपातकाल में ही होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) की संरचना, स्वतंत्रता और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि आयोग के आधे सदस्यों के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक न्यायिक सेवा का अनुभव होना चाहिए।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल 'कदाचार' के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है, किंतु इसके लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जांच में उसे दोषी पाया जाना अनिवार्य होता है, और इस जांच के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए मानने हेतु संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या राज्य के विधानमंडल को यह शक्ति दी गई है कि वे विधि द्वारा संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग को क्रमशः संघ या राज्य के अधीन किसी भी लोक प्राधिकरण, स्थानीय प्राधिकारी या निगम की सेवाओं से संबंधित अतिरिक्त कार्यों को सौंपने का प्रावधान कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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खाद्य श्रृंखला में सबसे ज्यादा संख्या किसकी होती है?
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अनुच्छेद 23 क्या रोकता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर विधि बनाए, तो संसद को पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) का गठन संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, तथा सरकारिया आयोग (1983-88) की सिफारिश पर वर्ष 1990 में स्थापित इस स्थायी निकाय का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, सलाह देना तथा उन विषयों पर चर्चा करना है जिनमें राज्यों या केंद्र और राज्यों के समान हित हैं।
3. अनुच्छेद 262 के अंतर्गत संसद को अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी विवाद या परिवाद के न्यायनिर्णयन के लिए विधि द्वारा उपबंध करने की शक्ति प्राप्त है, तथा इस अनुच्छेद के तहत बनाई गई संसद की विधि के अंतर्गत यदि कोई कानून बनाया जाता है, तो उसमें सर्वोच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता को पूर्णतः वर्जित (Barred) किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित एवं मनोनीत) से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।
2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध ही पारित होने पर पूरी सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधानविषयक प्रस्ताव राष्ट्रपति को संसूचित करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के बिना ही कोई निर्णय लेने का निर्देश दे, तो प्रधानमंत्री उस निर्देश का पालन करने के लिए संविधानतः बाध्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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