Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 18 times
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित एवं मनोनीत) से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।
- 2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध ही पारित होने पर पूरी सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।
- 3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधानविषयक प्रस्ताव राष्ट्रपति को संसूचित करे, किंतु यदि राष्ट्रपति किसी विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के बिना ही कोई निर्णय लेने का निर्देश दे, तो प्रधानमंत्री उस निर्देश का पालन करने के लिए संविधानतः बाध्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा होता है, जिसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं होती। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 75 के तहत प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति होती है तथा अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को सूचना देने के लिए बाध्य है, किंतु राष्ट्रपति किसी भी विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के बिना अपनी इच्छा से कोई निर्णय नहीं ले सकता क्योंकि वह मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
अगला प्रश्न →
भारत में निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत…
Related Questions
→
भारतीय संविधान सभा की निर्माण प्रक्रिया, विभिन्न समितियों और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा की कुल बैठकों में से अधिकांश महत्वपूर्ण कार्यों को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से संघ शक्ति समिति, संघीय संविधान समिति और प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष क्रमशः पंडित जवाहरलाल नेहरू, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
2. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे 29 अगस्त 1947 को नियुक्त किया गया था, में अध्यक्ष सहित कुल सात सदस्य थे, और इस समिति का मुख्य कार्य संविधान के प्रारूप पर विचार करना था, किंतु इसके द्वारा तैयार किए गए पहले प्रारूप पर आम जनता, प्रेस और प्रांतीय विधानसभाओं से कोई सुझाव या टिप्पणियाँ आमंत्रित नहीं की गई थीं।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के दौरान कुल तीन वाचन (Readings) हुए थे, और अंततः 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया, जिसमें उस समय सभा के उपस्थित कुल 284 सदस्यों ने अपने हस्ताक्षर किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) की स्वतंत्रता, अधिकार क्षेत्र और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस आयोग के अध्यक्ष के रूप में पुनः नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं।
2. अनुच्छेद 320 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग से अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं के पदों के लिए भर्ती से संबंधित सभी विषयों पर परामर्श किया जाना आवश्यक है, किंतु यदि सरकार किसी मामले में आयोग से परामर्श करने में असफल रहती है, तो प्रभावित अभ्यर्थी इस आधार पर किसी भी न्यायालय में वाद दायर कर सकता है।
3. अनुच्छेद 323 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग का यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्रपति को आयोग के द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करे, और राष्ट्रपति ऐसी रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा, जिसके साथ उस मामले में (यदि कोई हों जिनमें आयोग की सलाह नहीं मानी गई थी) अस्वीकार किए जाने के कारणों का ज्ञापन भी संलग्न होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की जा सकती है, और 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को मूल संविधान के 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द के स्थान पर जोड़ा गया, साथ ही इसके लिए मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति को भी राष्ट्रपति द्वारा उद्घोषणा जारी करने से पूर्व अनिवार्य बना दिया गया।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XVIII में अनुच्छेद 352 के तहत यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति द्वारा की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को देश के केवल किसी एक विशेष भाग तक ही सीमित रखा जा सकता है, संपूर्ण भारत पर लागू करना अब अनिवार्य नहीं रहा।
3. आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के निलंबन के संबंध में व्यवस्था यह है कि अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आदेश द्वारा भाग III में प्रदत्त अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन के बाद से आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं, किंतु रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा परामर्श के माध्यम से किया जाना तय हुआ था, न कि निर्वाचन द्वारा।
2. संविधान सभा की कुल 389 प्रस्तावित सीटों में से 292 सीटें ब्रिटिश प्रांतों के गवर्नरों के प्रांतों से, 4 सीटें मुख्य आयुक्त के प्रांतों (Chief Commissioners' Provinces) से और 93 सीटें भारतीय रियासतों (Princely States) से भरी जानी थीं, तथा प्रत्येक प्रांत की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों - मुस्लिम, सिख और सामान्य (मुस्लिम व सिख को छोड़कर) में उनकी जनसंख्या के अनुपात में विभाजित किया गया था।
3. यद्यपि संविधान सभा के चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में हुए थे, तथापि इसमें महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ने संविधान सभा की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लिया था और देश के विभाजन को रोकने के लिए सभा के शुरुआती अधिवेशनों में अपनी सहमति दर्ज कराई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.