BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 27 times

भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 243-S के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के भीतर वार्ड समितियों (Ward Committees) या उससे अधिक वार्डों को मिलाकर एक से अधिक वार्ड समितियों का गठन किया जाना अनिवार्य है, बशर्ते कि उस नगरपालिका की कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक हो।
  2. 2. 74वें संविधान संशोधन द्वारा यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक राज्य में जिला योजना समिति (District Planning Committee) और महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाए, ताकि क्रमशः पूरे जिले और महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजनाएं तैयार की जा सकें, और इन समितियों के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य संबंधित पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाने चाहिए।
  3. 3. अनुच्छेद 243-ZD के अंतर्गत प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र के लिए गठित महानगर योजना समिति (MPC) के अध्यक्ष या सदस्यों के चयन के संबंध में संविधान ने यह विस्तृत उपबंध किया है कि इस समिति के सभी सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली द्वारा महानगर के वयस्क नागरिकों द्वारा किया जाएगा, और इसका अध्यक्ष हमेशा राज्य का राज्यपाल होगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 243-S के अनुसार, तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली प्रत्येक नगरपालिका के क्षेत्र में एक या अधिक वार्ड समितियाँ (Ward Committees) गठित की जानी चाहिए। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 243-ZD और 243-ZE के तहत जिला योजना समितियों (DPC) और महानगर योजना समितियों (MPC) के गठन का प्रावधान है, तथा यह अनिवार्य है कि इन समितियों के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाएं। कथन 3 गलत है क्योंकि महानगर योजना समिति (MPC) के सभी सदस्यों का प्रत्यक्ष चुनाव जनता द्वारा नहीं होता है, बल्कि कम से कम दो-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं, और इसका अध्यक्ष हमेशा राज्यपाल नहीं होता है बल्कि राज्य के विधि या प्रशासनिक नियमों द्वारा निर्धारित किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ… ← पिछला प्रश्न भारतीय संविधान की राजभाषा, राजनीतिक दलों (दल-बदल) और…

Related Questions

→ भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रान्ति काल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, बशर्ते कि राज्यपाल राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना किसी ऐसे अध्यादेश को प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय से संबंधित विधेयक को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति आवश्यक होती। 2. अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से कम नहीं होगी और न ही 12 मंत्रियों से कम होगी। 3. अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करना मुख्यमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है, तथा राज्यपाल के यह पूछने पर ऐसी सूचना प्रदान करना भी अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल अपनी स्वविवेककीय शक्तियों के प्रयोग में मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए हमेशा बाध्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (Acts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इस अधिनियम के तहत ही वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों के बीच अंतर किया गया तथा राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल' (नियंत्रण बोर्ड) की स्थापना की गई, जिससे ब्रिटिश सरकार का कंपनी के मामलों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हो गया। 3. चार्टर अधिनियम, 1833 ने भारत में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्रों के प्रशासन को केंद्रीकृत करने की दिशा में अंतिम कदम उठाया, जिसके तहत बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और पहली बार देश की संपूर्ण नागरिक एवं सैन्य शक्तियाँ उसमें निहित कर दी गईं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान की राजभाषा, राजनीतिक दलों (दल-बदल) और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों व भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, और इसी भाग के अनुच्छेद 345 के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, उस राज्य में प्रयुक्त होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य के सभी या किन्हीं राजकीय प्रयोजनों के लिए अपना सकेगा। 2. संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत यदि किसी राजनीतिक दल का कोई मनोनीत (Nominated) सदस्य सदन में शपथ ग्रहण करने के छह महीने के भीतर किसी अन्य राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर लेता है, तो उसे दल-बदल के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। 3. संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत संघ सूची (List I) में मूल रूप से 97 विषय थे, जिन्हें वर्तमान में बढ़ाकर 100 कर दिया गया है, जबकि राज्य सूची (List II) से कुछ विषयों को निकालकर समवर्ती सूची (List III) में स्थानांतरित करने का कार्य 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्रामीण विकास, कृषि, भूमि सुधार और लघु सिंचाई सहित ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 कार्यकारी विषयों पर विधायी और कार्यकारी शक्तियाँ प्रदान करने का दायित्व पूरी तरह से केंद्र सरकार के विधायी विवेक पर छोड़ा गया है, न कि राज्य विधानमंडल पर। 2. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस संविधान संशोधन के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्य की संचित निधि से पंचायतों को अनुदान देने के सिद्धांत तय करेगा। 3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों में महिलाओं के लिए न केवल सभी स्तरों पर कुल सीटों की संख्या का कम से कम एक-तिहाई (33.3%) स्थान आरक्षित किया गया है, बल्कि अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर भी महिलाओं के लिए इसी अनुपात में आरक्षण अनिवार्य किया गया है, और राज्यों को इससे अधिक आरक्षण देने की भी छूट दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.