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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और भारत में चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की होती है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश अनिवार्य होती है।
  2. 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों से संबंधित अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन से प्रायोजित विज्ञापनों पर रोक लगाने, चुनाव आचार संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन और लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रायोगिक उपयोग की संस्तुति की थी।
  3. 3. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने वाले खर्च की अधिकतम सीमा का निर्धारण निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है, और इस सीमा का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को 6 वर्ष की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी प्रक्रिया (महाभियोग जैसी रीति) से हटाया जाता है, किंतु अन्य किसी भी निर्वाचन आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता (अर्थात अन्य आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश आवश्यक है)। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश) वाली समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कथन 2 सही है; दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनावी सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने, बूथ कैप्चरिंग को रोकने और ईवीएम के उपयोग पर जोर दिया था। कथन 3 गलत है क्योंकि चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा का निर्धारण चुनाव आयोग द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (कानून और न्याय मंत्रालय) द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(3) के तहत किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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