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Indian Polity
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भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम कब लागू हुआ?

Detailed Explanation

RTI 2005 में लागू हुआ।
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत किसी विदेशी अर्जित भू-भाग (Acquired Territory) को भारत में शामिल करने के लिए भी अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने के लिए कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद में पुनः स्थापित नहीं कर सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका विचार जानने के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होता है। 3. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से कानून बनाना पर्याप्त है, और इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। 4. 100वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2015 के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ भू-भागों की अदला-बदली (Land Boundary Agreement) की गई थी, जिसे लागू करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करना आवश्यक था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' (Law) के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाले अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचनाएं तो शामिल हैं, किंतु कोई प्रथा या रीति (Custom or Usage) जिसके पास विधि का बल है, इसके दायरे में नहीं आती है। 2. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार देता है, किंतु राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या तकनीकी अर्हता (Professional or Technical Qualifications) से संबंधित प्रतिबंध आरोपित कर सके और साथ ही राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (Monopoly) अपने हाथ में लिए जाने को विधि-मान्यता प्रदान कर सके। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद' (1950) में अपनाए गए संकुचित दृष्टिकोण को पलटते हुए 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह अभिनिर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के संरक्षण के लिए 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में अमेरिकी संविधान के 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due Process of Law) के तत्वों, अर्थात् प्रक्रिया के न्यायसंगत, निष्पक्ष और तार्किक होने की अनिवार्यता को भी शामिल माना जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया? भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता, अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण तथा प्रशासनिक शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय का यह रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, तथा राज्यपाल द्वारा न्यायिक सेवा के अन्य व्यक्तियों की नियुक्ति राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है। 3. अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण की शक्ति, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ अदालतों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पोस्टिंग, पदोन्नति और छुट्टियों का अनुदान शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होती है, न कि राज्य के राज्यपाल या कार्यपालिका के पास। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-ZD के अंतर्गत प्रत्येक जिले में जिले के लिए एक जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो जिले में पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार की गई योजनाओं को समेकित करेगी और संपूर्ण जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-पंचमांश (80%) सदस्य उस जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा उनके अपने बीच से ही चुने जाने चाहिए। 2. अनुच्छेद 243-ZE के अधीन प्रत्येक महानगर क्षेत्र के लिए एक महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाता है, और इस समिति के गठन के संबंध में यह संवैधानिक प्रावधान है कि इसके कुल सदस्यों में से दो-तिहाई सदस्य अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार या राज्य सरकार के मनोनीत अधिकारी होने चाहिए ताकि शहरी बुनियादी ढांचे का केंद्रीयकृत नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। 3. अनुच्छेद 243-T के अनुसार नगरपालिकाओं के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल आरक्षित सीटों का कम से कम एक-तिहाई (यानि 33 प्रतिशत) हिस्सा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, और यह आरक्षण केवल वार्ड सदस्यों के पदों पर लागू होता है, नगर निगमों के महापौर (Mayor) या नगरपालिकाओं के अध्यक्ष के पदों पर नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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