BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 16 times

भारतीय संविधान के भाग-I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे नियमों और शर्तों पर, जिन्हें वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जो कि बाह्य राज्यों (विदेशी भू-भाग) के प्रवेश से संबंधित है।
  2. 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य में से उसका राज्यक्षेत्र अलग करके, दो या अधिक राज्यों को मिलाकर अथवा किसी राज्यक्षेत्र को किसी राज्य के भाग के साथ मिलाकर नए राज्य का निर्माण करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रकार के किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  3. 3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों का प्रवेश या गठन तथा सीमाओं, क्षेत्रों या नामों में परिवर्तन करने वाली विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन माना जाएगा, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ आधे से अधिक राज्यों के विधानमंडलों की अनुसमर्थन (Ratification) की आवश्यकता अनिवार्य होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 2 संसद को भारत के संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है, जो मुख्य रूप से बाह्य क्षेत्रों (विदेशी भू-भाग) से संबंधित है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या क्षेत्रों/सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की 'पूर्व सिफारिश' (Prior Recommendation) के बिना संसद में पेश नहीं किया जा सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 4 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, अर्थात इन्हें संसद के साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा पारित किया जाता है, न कि विशेष बहुमत और राज्यों के अनुसमर्थन से। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय संसद के गठन, लोकसभा और राज्यसभा की संरचना तथा विधाई प्रक्रिया के संदर्भ… ← पिछला प्रश्न भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत…

Related Questions

→ भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि भारत का कोई नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और यह नियम युद्ध काल या आपातकाल (Emergency) की स्थिति में भी समान रूप से लागू रहता है। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारत में नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके बताए गए हैं—जन्म द्वारा, वंश द्वारा, पंजीकरण द्वारा, देशीयकरण द्वारा और भूमि के अर्जन द्वारा। 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें देशीयकरण (Naturalisation) के माध्यम से नागरिकता प्रदान करने के लिए निवास की आवश्यक अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों तथा राजनैतिक दलों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों द्वारा जोड़ा गया और वर्तमान में इसमें कुल 22 भाषाएँ हैं, किंतु अंग्रेजी और राजस्थानी भाषाएं अभी भी इस अनुसूची में शामिल नहीं हैं। 2. संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343-351) के अंतर्गत संघ की राजभाषा का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा, तथा संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा के शासकीय प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए जारी रख सकती है। 3. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रीय दलों (National Parties) को मान्यता प्रदान की जाती है, और इसके लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार किसी दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा तब मिलता है जब वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट और 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति वॉरेन हेस्टिंग्स थे, जिनकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया था, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई थी। 2. 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और राजनीतिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की स्थापना की गई थी। 3. 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को 'ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया, जिससे ब्रिटिश संसद का कंपनी के प्रशासन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण और अधिक सुदृढ़ हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67 के अनुसार उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए राज्य सभा द्वारा ऐसा प्रस्ताव पारित किया जाना अनिवार्य है जिससे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किया गया हो और जिस पर लोक सभा की सहमति आवश्यक रूप से प्राप्त हो, किंतु इसके लिए लोक सभा में साधारण बहुमत का होना ही पर्याप्त है। 2. अनुच्छेद 75 के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होती है, न कि संपूर्ण संसद के प्रति। 3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आकार के संबंध में 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोक सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, किंतु यह नियम राज्य स्तर पर विधान सभाओं के संदर्भ में लागू नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.