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Indian Polity
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ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास के प्रारंभिक चरणों के अंतर्गत पारित 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' (Pitt's India Act, 1784) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अधिनियम द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई थी।
  2. 2. इस अधिनियम के माध्यम से गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या चार से घटाकर तीन कर दी गई, ताकि गवर्नर-जनरल को निर्णय लेने में सुगमता हो और विशेष परिस्थिति में उसे निर्णायक मत (Casting Vote) का अधिकार भी प्रदान किया गया।
  3. 3. इस अधिनियम द्वारा पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को 'ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि ब्रिटिश सरकार का कंपनी के प्रशासन पर नियंत्रण और अधिक सुदृढ़ हो चुका है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) को बरकरार रखा गया और राजनीतिक मामलों (जैसे सैन्य, राजस्व और प्रशासनिक नियंत्रण) के अधीक्षण के लिए एक नए निकाय 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) का गठन किया गया था, यानी दोनों निकायों के कार्य उलट दिए गए थे। कथन 2 सही है, इस अधिनियम ने गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या चार से घटाकर तीन कर दी ताकि बहुमत के कारण प्रशासनिक गतिरोध उत्पन्न न हो। कथन 3 सही है, इस अधिनियम के द्वारा पहली बार कंपनी के भारतीय क्षेत्रों को 'ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया था। अधिक जानकारी और संपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भाग IV-A में वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और मूलतः संविधान में 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे, जबकि 11वाँ मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया, जो छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षण को शिक्षा के अवसर प्रदान करने से संबंधित है। 2. ये सभी मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, तथा प्रकृति से ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो संसद विधि द्वारा उसके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए कानून बना सकती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, यद्यपि मूल कर्तव्यों को मूल अधिकारों की तरह न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है, किंतु संवैधानिक वैधता या कानूनों की व्याख्या के समय न्यायालय इन कर्तव्यों का उपयोग यह परीक्षण करने के लिए कर सकता है कि कोई कानून जनहित में है या नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को ही कुछ संशोधनों के पश्चात भारतीय संविधान की प्रस्तावना के रूप में स्वीकार किया गया था, और यह प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रेरित होकर सबसे पहले लिखित संविधान में प्रस्तावना को शामिल करने की परंपरा का अनुसरण करती है। 2. 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