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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का स्पष्ट आधार प्रदान करता है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई कोई भी ऐसी विधि जो भाग-III के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, अपने उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगी।
  2. 2. अनुच्छेद 15(5) के तहत राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों (अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों सहित) में प्रवेश के संबंध में विशेष उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई है।
  3. 3. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) के संरक्षण का अधिकार केवल किसी न्यायालय के समक्ष या न्यायिक अधिकरण (Judicial Tribunal) की कार्यवाही में अभियोजित किए जाने और दंडित किए जाने पर लागू होता है, यह विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकारियों के समक्ष की गई कार्रवाइयों पर लागू नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 13(2) राज्य को ऐसी कोई भी विधि बनाने से रोकता है जो मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और ऐसी प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी। यह अनुच्छेद भारत में न्यायिक समीक्षा की शक्ति का संवैधानिक आधार प्रस्तुत करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 15(5) द्वारा दी गई विशेष उपबंध करने की शक्ति 'अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों' (Article 30(1) के अंतर्गत आने वाले) पर लागू नहीं होती है। कथन 3 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत 'डबल जेपर्डी' या दोहरे दंड से संरक्षण का अधिकार केवल न्यायिक न्यायालय या अधिकरण के समक्ष अभियोजन और दंड पर ही लागू होता है, विभागीय (Departmental) या प्रशासनिक प्राधिकारियों द्वारा दी गई अनुशासनिक कार्रवाइयों पर यह लागू नहीं होता है। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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