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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 18 के अंतर्गत उपाधियों का अंत किया गया है, जिसके तहत राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय कोई भी उपाधि प्रदान नहीं करेगा, तथा भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है।
- 2. अनुच्छेद 20 के खंड (2) में वर्णित 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के संरक्षण का लाभ केवल उन्हीं मामलों में प्राप्त होता है जहाँ व्यक्ति का अभियोजन और कारावास किसी न्यायालय या न्यायिक अधिकरण (Judicial Tribunal) के समक्ष हुआ हो, यदि किसी विभागीय या प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक दंड दिया गया है तो इस सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता है।
- 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार का विस्तार केवल मनमाने कार्यकारी क्रियाकलापों के विरुद्ध सुरक्षा तक सीमित है, और इसके दायरे में संसद द्वारा बनाई गई विधियों (Law) के माध्यम से स्थापित प्रक्रिया को चुनौती देने का अधिकार शामिल नहीं है, भले ही वह विधि अनुचित या अन्यायपूर्ण हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 18 के तहत राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि प्रदान नहीं कर सकता और नागरिकों द्वारा विदेशी उपाधियाँ ग्रहण करने हेतु राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है। कथन 2 सही है क्योंकि 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) का संरक्षण (अनुच्छेद 20(2)) केवल आपराधिक न्यायालयों या न्यायिक अधिकरणों के समक्ष अभियोजन और दंड के मामलों में लागू होता है, विभागीय या प्रशासनिक कार्रवाई पर नहीं। कथन 3 गलत है, क्योंकि 'मेनका गांधी वाद' (1978) के पश्चात उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) का दायरा व्यापक करते हुए 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के सिद्धांतों को भी इसमें शामिल कर लिया है, जिसके तहत संसद द्वारा बनाई गई विधि भी न्यायसंगत और तर्कसंगत होनी चाहिए। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान की राजभाषा, राजनीतिक दलों से संबंधित प्रावधानों तथा संविधान की अनुसूचियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें, 92वें और 96वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से कुल 22 भाषा किया गया, और 96वें संशोधन द्वारा 'उड़िया' शब्द के स्थान पर 'ओड़िया' किया गया तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को जोड़ा गया।
2. दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के प्रावधानों के तहत यदि किसी राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी अन्य दल में विलय (Merger) कर लेते हैं, तो वे दलबदल के आधार पर अयोग्यता से सुरक्षित रहते हैं, तथा इस विलय के लिए यह आवश्यक है कि मूल राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलीनीकरण हुआ हो।
3. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 यह अनिवार्य करता है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाहियाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों और विधेयकों के आधिकारिक पाठ केवल अंग्रेजी भाषा में ही होंगे, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों की संरचना, प्रक्रिया और विधान परिषद (Legislative Council) के गठन तथा उत्सादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित किया हो।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, किंतु किसी भी स्थिति में इसकी कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, सिवाय इसके कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के बाद अब यह नियम सभी राज्यों पर एक समान लागू होता है।
3. विधान परिषद के कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्य राज्य के स्थानीय प्राधिकारियों (जैसे नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों आदि) के निर्वाचक मंडल द्वारा चुने जाते हैं, और एक-बारहवां हिस्सा ऐसे स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो उस राज्य में कम से कम तीन वर्ष से निवास कर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता और अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को रिट (Writ) जारी करने की जो शक्ति प्राप्त है, वह न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे साधारण विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और इस दृष्टि से उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, किंतु न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग तथा उच्च न्यायालय से परामर्श के आधार पर नियमों के तहत की जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों के नीचे के न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन, पदस्थापन और अनुशासनिक नियंत्रण शामिल है, पूर्णतः संबंधित राज्य सरकार (राज्यपाल) के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के राष्ट्रपति की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति पूरी तरह से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की सलाह के अधीन होती है, जिसका अर्थ है कि यदि मंत्रिमंडल लोकसभा को भंग करने की सलाह देता है, तो राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए पूर्णतः बाध्य है।
2. राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति रखता है, जो अनुच्छेद 108 के तहत किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीचरोध उत्पन्न होने पर बुलाई जाती है, और इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, तथा यदि वह अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति इसकी अध्यक्षता करते हैं।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संबंध में मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर संघ के प्रशासन से संबंधित जानकारी राष्ट्रपति को प्रदान करे।
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनावी सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग एक अखिल भारतीय निकाय है जो संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति रखता है, तथा मूल संविधान में इसे एक बहु-सदस्यीय संस्था के रूप में स्थापित किया गया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य आयुक्तों का प्रावधान था।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनावी सुधारों पर अपनी संस्तुति देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली (जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों) की सिफारिश की थी, तथा सरकारी धन से चुनाव प्रचार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के देशव्यापी उपयोग पर बल दिया था।
3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत एक उम्मीदवार को एक समय में अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव लड़ने की अनुमति है, और यदि कोई उम्मीदवार दोनों सीटों पर विजयी होता है, तो उसे नियत समयावधि के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, जिससे होने वाले उपचुनाव का संपूर्ण व्यय संबंधित विजयी उम्मीदवार से वसूले जाने का वैधानिक प्रावधान है।
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